Essay on Delhi Metro in Hindi दिल्ली मेट्रो रेल पर निबंध

हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु Essay on Delhi Metro in Hindi पर पुरा आर्टिकल। आज हम आपके सामने Delhi Metro के बारे में कुछ जानकारी लाये है जो आपको हिंदी essay के दवारा दी जाएगी। आईये शुरू करते है Essay on Delhi Metro in Hindi

दिल्ली मेट्रो रेल पर निबंध – 1

दिल्ली मेट्रो रेल पर निबंध

भारत की राजधानी दिल्ली है जिसकी आबादी दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। इसी कारण यहाँ पर यातायात की समस्या भी विकराल होती जा रही है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए दिल्ली सरकार ने मेट्रो रेल का कार्यक्रम बनाया।

भारत सरकार ने एक विदेशी कम्पनी के साथ अनुबंध कर दिल्ली में दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड’ का गठन कर लगभग 6000 करोड़ की परियोजना के अन्तर्गत मेट्रो रेल चलाने का निश्चय किया। पहली मेट्रो रेल का शुभारम्भ 24 दिसम्बर, 2003 को शाहदरा से कश्मीरी गेट तक हुआ था। इस अवसर पर दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमन्त्री श्रीमति शीला दीक्षित तथा पूर्व मुख्यमन्त्री मदनलाल खुराना के अतिरिक्त अनेक केन्द्रीय तथा दिल्ली सरकार के मंत्री तथा अधिकारी भी उपस्थित थे।

दूसरे चरण में शाहदरा से रिठाला तक लगभग 21 किलोमीटर की। दूरी के लिए 31 मार्च, 2004 को मेट्रो रेल को चलाया गया। शाहदरा से रिठाला के लिए मेट्रो के 18 स्टेशन बनाए गए। इनमें शाहदरा, वैलकम, सीलमपुर, शास्त्रीपार्क, कश्मीरी गेट, तीस हजारी, पुलबंगश, प्रताप नगर, शास्त्री नगर, इन्द्रलोक, कन्हैया नगर, केशवपुरम्, नेताजी सुभाष प्लेस, कोहाट एन्कलेव, पीतम पुरा, रोहिणी पूर्त, रोहिणी पश्चिम तथा रिठाला के निवासियों को मेट्रो रेल के उपयोग का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मेट्रो का तीसरा तथा चौथा चरण वर्ष 2005 के अन्त में पूरा हुआ जिसमें अपर गामी मार्ग बाराखम्बा से पटेल नगर, मोतीनगर, तिलक नगर, उत्तम नगर, द्वारका तक है, जिसमें 22 स्टेशन बनाए गए हैं तथा इसका  दी लगभग 23 किलोमीटर है। भूमिगत मैट्रो रेल, जो केन्द्रीय टर्मिनल से कनॉट प्लेस, चावडी बाजार, नयी, पुरानी दिल्ली होती हुई विश्वविद्यालय तक जाती है, जिसमें 10 स्टेशन बनाए गए हैं इसकी दूरी लगभग 22 किलोमीटर है।

मेट्रो रेल के चलने से दिल्लीवासियों को यातायात के जाम की समस्या का समाधान मिला। दिल्ली में मेट्रो रेल कारपोरेशन निगम ने मेट्रो रेल परिचालन के लिए लगभग 600 व्यक्तियों को हांगकांग भेजकर तकनीकी शिक्षा दिलाकर मेट्रो रेल का शुभारम्भ किया था।

 

मेट्रो स्टेशनों पर स्वचालित सीढ़ियाँ लगी हैं साथ ही प्रत्येक स्टेशन पर लिफ्ट भी लगाई गई है। मेट्रो रेल में यात्रा करने के लिए स्टेशन पर टिकट के रूप में एक गोल टोकन दिया जाता है। दूरी तथा दर के अनुसार टोकन के रंग अलग-अलग हैं। स्टेशन से टोकन लेकर यात्री को रेल तक पहुँचने के लिए रास्ते में लगी बाधा पर टोकन दिखाने पर ही रास्ता मिलता है।

यात्रा पूरी होने पर स्टेशन पर लगी बाधा के भीतर दिया गया टोकन डालने से बाधा दूर होने पर स्टेशन से बाहर अया जाता है।

मेट्रो रेल में हर एक डिब्बे में आने वाले स्टेशन की घोषणा होती रहती है, साथ ही कम्प्यूटर द्वारा स्वचालित संदेशों का भी प्रसारण होता है, जिनमें आने वाले स्टेशन की भी जानकारी मिलती है। पूर्णतया वातानुकूलित मेट्रो रेल में यात्रा करना एकदम सुखद अहसास है। सड़क पर यातायात की विकट समस्या जाम से दूर यात्री कम समय में ही अपने गंतव्य तक पहुँच जाता है।

पूरी दिल्ली में मेट्रो के दोनों चरण भूमिगत तथा अपरगामी समाप्त हो जाने के पश्चात् दिल्ली के निकटवर्ती राज्यों के जिलों को भी मेट्रो रेल द्वारा दिल्ली से जोड़े जाने का प्रावधान है, जिसमें गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुडगाँव, नोएडा, बहादुरगढ़ आदि नाम प्रमुख हैं।

सम्भवतः वर्ष 2010 तक मेट्रो रेल का यह सपना साकार हो जाएगा तथा दिल्ली में होने वाले 2010 के ‘कॉमनवेल्थ गेम्स’ के समय तक सभी आने जाने वालों को कोई असुविधा नहीं होगी।

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दिल्ली मेट्रो रेल पर निबंध – 2

दिल्ली की मैट्रो रेल यातायात की अत्याधुनिक सुविधा है। यह राजधानी के लाखों लोगों के लिए वरदान सिद्ध हुई है। इस सुविधा के होने से समय, श्रम और धन तीनों | की बचत होती है। इससे सड़क यातायात का बोझ कुछ कम हुआ है। लोग बसों की भीड़-भाड़, धूल और उबाऊ यात्रा से बचकर अब मैट्रो रेल से आरामदायक ढंग से यात्रा करना पसंद करने लगे हैं।

हालाँकि दिल्ली में मैट्रो रेल सन् 2002 से चलनी आरंभ हुई थी परंतु अभी भी नए मार्गों पर इसका काम चल रहा है। है रेल के चलने से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर पहले से कम हुआ है।

मैट्रो रेल पूर्णतया स्वचालित एवं वातानुकूलित सुविधा है। यह नियमित अंतराल पर पूरे नियम से चलती है। स्टेशन एवं | बोगियों में साफ़-सफ़ाई की अच्छी व्यवस्था है। इसमें यात्रा करने के लिए लोग टोकन खरीदते हैं अथवा अपेक्षाकृत सस्ते स्मार्ट कार्ड का प्रयोग करते ।

मैट्रो रेल भारत की राजधानी की शान कही जा सकती है। इसे साफ़-सुथरा रखना स्थानीय जनता का कर्तव्य है

दिल्ली मेट्रो रेल पर निबंध – 3

प्रदूषण, जान लीलती दुर्घटनाएं और यातायात जाम की स्थिति से बचने के लिए सरकार ने राजधानी दिल्ली में मेट्रो रेल चलाने की कवायद शुरू की। विश्व में अब तक जापान, कोरिया, हांगकांग, सिंगापुर, जर्मनी तथा फ्रांस में मेट्रो रेल परिचालित हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार यदि समस्त दिल्ली में मेट्रो रेल के जो रूट तय किये गये हैं यदि वे शुरू हो जाते हैं तो राजधानी की सड़कों से लगभग छब्बीस सौ बसों की कमी हो जायेगी।

यही नहीं इसके अलावा करोड़ों रुपये का ईंधन भी बचेगा। मेट्रो रेल को लेकर किये गये एक अध्ययन में पता चला है कि वर्तमान में राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की संख्या पैंतीस लाख है। वाहनों की यह संख्या देश के तीन महानगरों-कोलकाता, मुम्बई व चेन्नई के कुल वाहनों से कहीं अधिक है। इन पैंतीस लाख वाहनों में नब्बे प्रतिशत वाहन निजी हैं। राजधानी में सड़कों की कुल लम्बाई बारह सौ अड़तालीस किलोमीटर है।

इस प्रकार शहर के इक्कीस प्रतिशत हिस्सों पर सड़कें फैली हैं। बावजूद इसके राजधानी की मुख्य सड़कों पर वाहनों की औसत गति पन्द्रह किलोमीटर प्रति घंटा है। इस रफ्तार को बढ़ाने और यातायात जाम की स्थिति से निपटने तथा सड़क हादसों में कमी लाने में मेट्रो रेल काफी सहायक सिद्ध हो सकती है।

1991 की जनगणना के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या 94 लाख थी। दस वर्षों बाद अर्थात् वर्ष 2001 में यह संख्या बढ़कर एक करोड़ सैंतीस लाख के करीब पहुंच गयी। इस प्रकार दस वर्षों में 43 लाख लोग राजधानी में अन्य राज्यों से आये।

इसी तरह वाहनों की संख्या में भी दस प्रतिशत की हर वर्ष बढ़ोत्तरी हो रही है। राजधानी के कुल वाहनों में से मात्र नब्बे प्रतिशत वाहन निजी हैं। इस तरह मात्र दस प्रतिशत वाहनों में सरकारी वाहनों को छेड़ शेष राजधानीवासियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में राजधानीवासियों को अच्छी परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही।

दिल्ली में मेट्रो रेल शुरू करने की मुख्य वजह यही है। हालांकि सरकार की ओर से नई रेल लाइनें बिछाकर दिल्ली के लोगों की यातायात समस्या कम करने का प्रयास किया गया। लेकिन मात्र एक प्रतिशत लोग ही इनका उपयोग कर रहे हैं। सरकार की ओर से राजधानी की परिवहन व्यवस्था सुविधाजनक बनाने के लिए पैंतीस से ज्यादा बार अध्ययन कराया जा चुका है।

दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ने राजधानी में विभिन्न चरणों के तहत मेट्रो रेल शुरू करने की योजना बनाई है। इसके पहले चरण के तहत मेट्रो रेल की शाहदरा तीस हजारी खण्ड सेवा शुरू हो गई है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने 24 दिसम्बर 2002 को किया। मेट्रो रेल अत्याधुनिक संचार व नियंत्रण प्रणाली से सुसज्जित है। इसके कोच अत्याधुनिक तकनीक तथा वातानुकूलित हैं।

टिकट वितरण प्रणाली भी स्वचालित है। इस प्रणाली के तहत ट्रेन की क्षमता जितने ही टिकट जारी किये जाते हैं। उससे अधिक टिकट जारी करने पर मशीन टिकट नहीं देती। इसके अतिरिक्त यह प्रणाली देश में पहली बार शुरू की गई है। स्टेशन में प्रवेश और निकासी की सुविधा भी एकदम आधुनिक है। यात्रियों की सुविधा के लिए मेट्रो स्टेशन परिसर पर एस्केलेटर संस्थापित किये गये हैं।

मेट्रो यात्रियों को अन्य परिवहन साधन की सेवा लेने में दिक्कत न हो इसके लिए मेट्रो स्टेशनों को बस रूट से जोड़ा गया है। इसके लिए मेट्रो स्टेशन से मुख्य सड़क या बस स्टैण्ड तक फीडर बसें चलाई जा रही हैं। इसके पहले चरण के तहत शाहदरा तीस हजारी शुरू हो चुका है।

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इसके दूसरे चरण के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय से न्यू आजादपुर, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर (8.6 किमी), केन्द्रीय सचिवालय, बसन्त कुंज (18.2 किमी.) और बाराखम्बा रोड-इन्द्रप्रस्थ-नोएडा (15.3 किमी) परियोजना अनुमोदित है। इसे पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2010 तक रखा गया है।

शाहदरा तीस हजारी (8.3 किमी) पर मेट्रो रेल सेवा शुरू होने के बाद अब तीस हजारी से त्रिनगर के मध्य करीब 4.5 किमी लम्बाई वाले रूट पर निर्माण कार्य जोर-शोर से जारी है। यह पूरा हो जाने पर फिर इसे यहां से (त्रिनगर) से रिठाला के बीच करीब 8.5 किमी मार्ग का निर्माण कार्य भी चल रहा है। इसके अलावा बाराखम्बा रोड से त्रिनगर (7.16 किमी), कीर्ति नगर से द्वारिका (16 किमी.) का कार्य भी अभी शुरू किया जाना है। इसमें विकलांगों के लिए विशेष सुविधा है। भीड़-भाड़ भरी सड़कों, धुएं व धूल-मिट्टी से बचकर लोग इस वातानुकूलित ट्रेन से सफर कर यात्रा का आनन्द उठा रहे हैं। इसकी किराया दर भी अन्य परिवहन साधनों की अपेक्षा कम रखी गई है।

पहले चरण के तहत शुरू शाहदरा तीस हजारी मार्ग पर शाहदरा स्टेशन से तीस हजारी पहुंचने में मेट्रो रेल मात्र तेरह मिनट ले रही है। इसी मार्ग पर यदि बस या अन्य यातायात साधन से जाया जाए तो करीब तीस से चालीस मिनट का समय लगता है। किराया भी मेट्रो रेल जितना ही लगता है। ऐसे में ज्यादातर लोग बसों को छोड़ मेट्रो रेल से यात्रा कर रहे हैं।

मेट्रो रेल के दरवाजे स्वचालित हैं। इसमें आगमन/प्रस्थान/आगे वाले स्टेशनों के संबंध में जानकारी इसमें सवार यात्री को सूचना प्रदर्शन पटल और संबोधन प्रणाली द्वारा उपलब्ध करायी जा रही है। इसमें यात्री द्वारा अपने सामान ले जाने की अधिकतम सुविधा पन्द्रह किग्रा है।

इसके अलावा यदि यात्री चाहे तो मासिक पास भी बनवा सकता है। मेट्रो रेल के कोच कोरिया से आयात किया गया है। मेट्रो रेल के तकनीकी कर्मचारी तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ विदेशों से भी प्रशिक्षण प्राप्त करके आये हैं।

दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन द्वारा एक प्रशिक्षण स्कूल की स्थापना भी की गई है। इसमें ड्राइवरों और परिचालनों संबंधी समय-समय पर कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। तीस हजारी शाहदरा खण्ड को छोड़कर अन्य कई रूटों पर निर्माणाधीन मेट्रो परियोजना ऊपरी सतह के साथ-साथ भूमिगत भी होगी।

दिल्ली मेट्रो रेल के अनुसार उसे वर्ष 2005 तक सात मार्गों पर मेट्रो रेल सेवा शुरू करनी है। वर्तमान में बाराखम्बा रोड से द्वारका परियोजना पर कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय से केन्द्रीय सचिवालय के मध्य भी निर्माण कार्य जोर-शोरों से जारी है। इस रूट के तहत कई जगह मेट्रो रेल भूमिगत चलेगी।

राजधानी में बढ़ती जनसंख्या और उस अनुपात में यातायात के साधनों के सुलभ न होने से राजधानीवासियों के सम्मुख यातायात सेवाओं की समस्या थी वहीं बढ़ते वाहनों के कारण ट्रैफिक जाम व प्रदूषण के कारण भी उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

सरकार के समक्ष भी यह एक मुख्य समस्या थी। राजधानी में बढ़ती आबादी और यातायात प्रणाली पर पड़ने वाले बोझ को देखते हुए योजनाकारों ने 1950 के दशक में ही इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया था।

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