Essay on Shivratri in Hindi – महाशिवरात्रि पर निबंध

Essay on Shivratri in Hindi – महाशिवरात्रि पर निबंध
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हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु Essay on Shivratri in Hindi पर पुरा आर्टिकल। आज हम आपके सामने Shivratri के बारे में सारी जानकारी बताएंगे जो आपको अपने hindi essay करने मे बहुत मदद मिलेगी . आईये शुरू करते है Essay on Shivratri in Hindi

Essay on Shivratri in Hindi

Essay on Shivratri in Hindi

प्रस्तावना :

जितनी आस्तिकता हमारे भारतवासियों में है, उतनी किसी और देश में नहीं है। भारतवर्ष के हिन्दू लोग अपने 33 करोड़ देवी-देवताओं को पूजते हैं (लेकिन में आपको ये बताना कहूंगा की हमारे ग्रंथो में 33 कोटि लिखा हुवा लेकिन कुछ नासमझो ने कोटि को करोड़ मान लिया लेकिन कोटि का दूसरा मतलब प्रकार होता है तो इसका मतलब है की हिन्दू धर्म में 33 प्रकार के देवी-देवताओं की पूजा की जाती है
और उन सब देवी-देवताओं में भगवान शिव का स्थान सर्वोपरि हैं। ‘शैव” नामक सम्प्रदाय शिव-भक्तों ने ही चलाया था। लोग शंकर भगवान को अनेक नामों जैसे, भोले नाथ, त्रिनेत्र, पार्वतीनाथ, शंकर, पशुपतिनाथ  से पुकारते हैं तथा उनकी पूरा श्रद्धा तथा विश्वास से पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान शिव की महिमा : भगवान शिव की अपरम्पार महिमा अवर्णनीय हैं।

शिव पुराण के आधार पर भगवान शिव ही सभी जीव-जन्तुओं के स्वामी तथा पालन-हार माने जाते हैं। संसार के सभी जीव-जन्तु भगवान शिव की इच्छानुसार ही तो कार्य-व्यापारक करते हैं। शिव पुराण में यह भी कहा गया है कि भोलेनाथ छह महीनों तक कैलाश पर्वत पर तपस्या करते हैं तथा उस समय सभी कीट-पतंग भी अपने बिलों में प्रवेश कर लेते हैं।

यह कार्य सावन  के महीने की कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन हुआ करता है। इसी दिन ही महान शिवरात्रि पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस महान पर्व पर भक्तजन काँवड लाकर अपने इष्टदेव पर चढ़ाते हैं।

शिव अवतरण :

इसके पश्चात छः महीने तक भगवान शिव कैलाशपर्वत से अवतरण करके धरती पर श्मशान घाट में निवास किया करते हैं।भगवान शिव के धरती पर आने के साथ ही सारे जीव-जन्तु व कीट-पतंगभी धरती पर विचरने लगते हैं। भगवान शिवजी का यह अवतरण हर सालफाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होता है। यही महानदिन शिव रात्रि के रूप में भक्तों द्वारा बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। सभीभक्त-जन पूजा अर्चना करते हैं तथा पूरे दिन का उपवास भी रखते हैं।

पूजा की विधि :

महाशिव रात्रि के पर्व पर शिव मन्दिरों की शोभादर्शनीय होती है। सभी भक्तजन इस दिन ‘शिवलिंग पर जल चढ़ाकर भगवानशिव का आशीर्वाद लेना चाहते हैं। इस दिन श्रद्धालु निराहार व्रत रखते हैं।| बुद्ध लोग दिन में फल, दूध, मेवे आदि ले लेते हैं। इसके अतिरिक्त भगवानशिव के वाहन ‘नन्दी’ की भी इस रात को पूजा व सेवा की जाती है।

 निष्कर्ष :

महाशिव रात्रि का यह पर्व बहुत महान पर्व है इस दिनगंगा-स्नान का भी विशेष महत्त्व तथा पुण्य है। ऐसा भी विश्वास किया| जाता है कि इस दिन भगवान शिवजी ने गंगा के तेज प्रवाह को अपनीजटाओं में धारण करके इस संसार के उद्धार के लिए उसे धीरे-धीरे धरतीपर छोड़ा था। इसीलिए प्रत्येक हिन्दू इस पर्व को इतनी श्रद्धा तथा विश्वाससे मनाता है।

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Essay on Shivratri in Hindi

भारतवर्ष में हिन्दुओं के 33 करोड़ देवी-देवता नहीं होते हैं  (लेकिन में आपको ये बताना कहूंगा की हमारे ग्रंथो में 33 कोटि लिखा हुवा लेकिन कुछ नासमझो ने कोटि को करोड़ मान लिया लेकिन कोटि का दूसरा मतलब प्रकार होता है तो इसका मतलब है की हिन्दू धर्म में 33 प्रकार के देवी-देवताओं की पूजा की जाती है
जिन्हें वे मानते तथा पूजते हैं परन्तु उनमें से प्रमुख स्थान भगवान शिव का है। भगवान शिव को मानने वालों ने शैव नामक सम्प्रदाय चलाया। शैव सम्प्रदाय के अधिष्ठाता एवं प्रमुख देवता भगवान शिव ही माने जाते हैं। भगवान शिव को शंकर, भोलेनाथ, पशुपति, त्रिनेत्र, पार्वतीनाथ आदि अनेक नामों से जाना व पुकारा जाता है।

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव सभी जीव-जन्तुओं के स्वामी एवं अधिनायक हैं। ये सभी जीव-जन्तु, कीट-पतंग भगवान शिव की इच्छा से ही सब प्रकार के कार्य तथा व्यापार किया करते हैं। शिव-पुराण के अनुसार भगवान शिव वर्ष में छः मास कैलाश पर्वत पर रहकर तपस्या में लीन रहते हैं। उनके साथ ही सभी कीट-पतंग भी अपने बिलों में बन्द हो जाते हैं।

उसके बाद छ: मास तक कैलाश पर्वत से उतर कर धरती पर श्मशान घाट में निवास किया करते हैं। इनके धरती पर अवतरण के साथ ही सारे कीट-पंतग भी धरती पर विचरण करते लगते हैं।

भगवान शिव का यह अवतरण प्रायः फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ करता है। अवतरण का यह महान् दिन शिवभक्तों में महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

महाशिवरात्रि के दिन शिव मन्दिरों को बड़ी अच्छी तरह से सजाया जाता है। भक्तगण सारा दिन निराहार रहकर व्रतोपवास किया करते हैं। अपनी सुविधानुसार सायंकाल में वे फल, बेर, दूध, आदि लेकर शिव मन्दिरों में जाते हैं। वहां दूध-मिश्रित शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराते हैं। तत्पश्चात् शिवलिंग पर फल, पुष्प व बेर तथा दूध भेंट स्वरूप चढ़ाया करते हैं। ऐसा करना बड़ा ही पुण्यदायक माना जाता है।

इसके साथ ही भगवान शिव के वाहन नन्दी की भी इस रात बड़ी पूजा व सेवा की जाती है। महाशिवरात्रि के दिन गंगा-स्नान का भी विशेष महत्त्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने गंगा के तेज प्रवाह को अपनी जटाओं में धारण करके इस मृत्युलोक के उद्धार के लिए धीरे-धीरे धरती पर छोड़ा था

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