बदलाव लाने वाली कहानियाँ Short Motivational Stories in Hindi For Student

नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। दोस्तों आज मैं आपको इस आर्टिकल में बताऊंगा Short Motivational Stories in Hindi जिन को पढ़ कर आपकी सोच बदल जाएगी। इसलिए आपके एक निवेदन करता हु ही इन दोनों कहानियो को पूरा पढ़े और हमें बताये की आपको कैसी लगी।तो दोस्तों इन 2 कहानियो के नाम है। 1. आज ही क्यों नहीं 2. कम अक्ल किसान जैसा की नाम से ही पता लग गया होगा की ये दोनों motivational stories है जो आपको motivate करने बहुत ज्यादा हेल्प करेगी।

 

 

1 हाथी की रस्सी ( other motivational stories No.1 )

एक आदमी हाथी के शिविर के पास से घूम रहा था, और उन्होंने देखा कि हाथियों को पिंजरों में नहीं रखा गया था और ना ही चेन से बांधा गया था। जबकी उन्हें भागने के बचाने के लिए सिर्फ एक छोटी सी रस्सी के टुकड़े से बांधा गया था जिसे हाथी बड़े आराम से तोड़ सकता था। लेकिन फिर भी हाथी रस्सी को तोड़ने की बिलकुल भी कोशिश नहीं कर रहे इस बात से वो आदमी बहुत ही ज्यादा परेशान हो गया था और इस बात का जवाब जानने के लिए वो हाथी के trainer यानि महारथ के पास गया वो अपना सवाल उन्हें बताया।

Short Motivational Stories Hindi

महारथ का जवाब था की जब हाथी बहुत छोटे थे तो उनको इसी तरह की रस्सी से बांधा जाता था लेकिन जब वो उस रस्सी को भी नहीं तोड़ पाते थे क्योकि वो बहुत छोटे थे। इसलिए उन्होंने ये सोच लिया था की वो इस रस्सी को कभी नहीं तोड़ सकते वो सोच उनकी अब तक बनी हुई है और इसी लिए वो अब रस्सी को तोड़ने के लिए कोशिश भी नहीं करना चाहते।

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है।

इससे हमें ये शिक्षा मिलती है की अगर हम किसी काम को करने का सोच ले तो उसको पूरी हिम्मत के साथ कोशिश करनी चाहिए क्योकि लोग अपने पुराने रीतिरिवाजों से तुम्हे उस काम को करने से रोकेंगे और ये विश्वास दिला देंगे की तुम इस काम को कभी नहीं कर सकते।

 

2 . आज ही क्यों नहीं  ( short motivational stories No.2 )

एक बार की बात है कि एक शिष्य अपने गुरु का बहुत आदर-सम्मान किया करता था |गुरु भी अपने इस शिष्य से बहुत स्नेह करते थे लेकिन वह शिष्य अपने अध्ययन के प्रति आलसी और स्वभाव से दीर्घसूत्री था |सदा स्वाध्याय से दूर भागने की कोशिश करता तथा आज के काम को कल के लिए छोड़ दिया करता था | अब गुरूजी कुछ चिंतित रहने लगे कि कहीं उनका यह शिष्य जीवन-संग्राम में पराजित न हो जाये|आलस्य में व्यक्ति को अकर्मण्य बनाने की पूरी सामर्थ्य होती है | ऐसा व्यक्ति बिना परिश्रम के ही फल की कामना करता है | वह शीघ्र निर्णय नहीं ले सकता और यदि ले भी लेता है,तो उसे पूरा नहीं कर पाता |

 

Short Motivational Stories Hindi

यहाँ तक कि अपने पर्यावरण के प्रति भी सजग नहीं रहता है और न ही भाग्य द्वारा प्रदान अवसरों का लाभ उठाने की कला में ही प्रवीण हो पता है |

उन्होंने मन ही मन अपने शिष्य के कल्याण के लिए एक योजना बना ली | एक दिन एक काले पत्थर का एक टुकड़ा उसके हाथ में देते हुए गुरु जी ने कहा –
‘मैं तुम्हें यह जादुई पत्थर का टुकड़ा, दो दिन के लिए दे कर, कहीं दूसरे गाँव जा रहा हूँ| जिस भी लोहे की वस्तु को तुम इससे स्पर्श करोगे, वह स्वर्ण में परिवर्तित हो जायेगी| पर याद रहे कि दूसरे दिन सूर्यास्त के पश्चात मैं इसे तुमसे वापस ले लूँगा |’

Short Motivational Stories Hindi

शिष्य इस सुअवसर को पाकर बड़ा प्रसन्न हुआ लेकिन आलसी होने के कारण उसने अपना पहला दिन यह कल्पना करते-करते बिता दिया कि जब उसके पास बहुत सारा स्वर्ण होगा तब वह कितना प्रसन्न, सुखी,समृद्ध और संतुष्ट रहेगा, इतने नौकर-चाकर होंगे कि उसे पानी पीने के लिए भी नहीं उठाना पड़ेगा | फिर दूसरे दिन जब वह प्रातःकाल जागा,

उसे अच्छी तरह से स्मरण था कि आज स्वर्ण पाने का दूसरा और अंतिम दिन है | उसने मन में पक्का विचार किया कि आज वह गुरूजी द्वारा दिए गये काले पत्थर का लाभ ज़रूर उठाएगा | उसने निश्चय किया कि वो बाज़ार से लोहे के बड़े-बड़े सामान खरीद कर लायेगा और उन्हें स्वर्ण में परिवर्तित कर देगा

दिन बीतता गया, पर वह इसी सोच में बैठा रहा की अभी तो बहुत समय है, कभी भी बाज़ार जाकर सामान लेता आएगा उसने सोचा कि अब तो दोपहर का भोजन करने के पश्चात ही सामान लेने निकलूंगा पर भोजन करने के बाद उसे विश्राम करने की आदत थी और उसने बजाये उठ के मेहनत करने के थोड़ी देर आराम करना उचित समझा.

पर आलस्य से परिपूर्ण उसका शरीर नीद की गहराइयों में खो गया, और जब वो उठा तो सूर्यास्त होने को था अब वह जल्दी-जल्दी बाज़ार की तरफ भागने लगा, पर रास्ते में ही उसे गुरूजी मिल गए उनको देखते ही वह उनके चरणों पर गिरकर, उस जादुई पत्थर को एक दिन और अपने पास रखने के लिए याचना करने लगा लेकिन गुरूजी नहीं माने और उस शिष्य का धनी होने का सपना चूर-चूर हो गया |

इस घटना की वजह से शिष्य को एक बहुत बड़ी सीख मिल गयी उसे अपने आलस्य पर पछतावा होने लगा, वह समझ गया कि आलस्य उसके जीवन के लिए एक अभिशाप है और उसने प्रण किया कि अब वो कभी भी काम से जी नहीं चुराएगा और एक कर्मठ, सजग और सक्रिय व्यक्ति बन कर दिखायेगा.

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है।

 

मित्रों, जीवन में हर किसी को एक से बढ़कर एक अवसर मिलते हैं , पर कई लोग इन्हें बस अपने आलस्य के कारण गवां देते हैं. इसलिए मैं यही कहना चाहती हूँ कि यदि आप सफल, सुखी, भाग्यशाली, धनी अथवा महान बनना चाहते हैं तो आलस्य और दीर्घसूत्रता को त्यागकर, अपने अंदर विवेक, कष्टसाध्य श्रम,और सतत् जागरूकता जैसे गुणों को विकसित कीजिये और जब कभी आपके मन में किसी आवश्यक काम को टालने का विचार आये तो स्वयं से एक प्रश्न कीजिये – “आज ही क्यों नहीं ?”

 

 

3. कम अक्ल किसान  ( short motivational stories No.3 )

एक किसान शहर से दूर अपने एक घर में रहता था। उसके घर में किसी प्रकार की कमी नहीं थी, लेकिन फिर भी वह किसान खुश नहीं था। उसे लगता जैसे यह गाँव एक जंगल हैं, और वह इसमें बहुत अकेला हैं। एक दिन उसने अपने गांव के घर को बेचकर, शहर में एक आलीशान बंगला लेने न निश्चय किया। दिन उसने अपने एक दोस्त को शहर से बुलाया, और रियल स्टेट में काम करता था। उसने उससे कहा, कि मेरा ये घर बेचकर मुझे शहर में एक अच्छा सा मकान दिला दो। उसके दोस्त ने उससे पूछा, भाई तुम ये अपना पूर्वजो का इतना सुन्दर घर क्यों बेचना चाहते हो ? कोई समस्या हैं या पैसो की कुछ जरुरत हैं तो मुझे बताओ। किसान ने अपने दोस्त की बात सुनकर उससे कहा – ये घर गांव से कई किलोमीटर दूर हैं।

यहाँ पर शहर की तरह पक्की सड़के नहीं हैं, सारे रास्ते उबड़ खाबड़ हैं। ये नदी जिसने बारिश होने पर पानी भर जाता हैं, इसे पर करके ही शहर को जाना पड़ता हैं। यहाँ इतने सारे पेड़ पौधे लगे हैं, जब हवा चलती हैं घर में पत्ते पत्ते हो जाते हैं, सफाई करने में भी बड़ी दिक्कत होती हैं। ये पहाड़ देखो, सर्दियों में इनपर बर्फ गिर जाती हैं, जिससे बड़ी दिक्कत होती हैं। अब बताओ मैं कैसे रह पाउँगा इस घर में।

Short Motivational Stories

उसके दोस्त ने कहा – ठीक हैं मैं जल्दी ही तुम्हारा घर बिकवा दूंगा। ऐसा कहकर वह चला गया। अगर दिन वह किसान सुबह अख़बार पढ़ रहा था, तब उसने अख़बार में एक घर का ऐड देखा। ऐड में लिखा था, शहर की भीड़ भाड़ से दूर, पहाड़ियों से घिरे हुए, ताजी हवा से परिपूर्ण एक सुन्दर घर में बसाये अपने सपनो का घर। घर खरीदने के लिए इस नंबर xxxxxxxxx पर संपर्क करे। किसान को वह ऐड बहुत पसंद आया। उसने उस घर को खरीदने के मन बना लिया। उसने जब उस नंबर पर फ़ोन किया, तब वह यह जानकार हैरान रहा गया, यह तो उसी के घर का ऐड हैं। अब वह से समझ गया, वह तो पहले से ही अपने पसंद के घर में रह रहा हैं। अब वह खुश था। उसने जल्दी से अपने दोस्त को फोन करके अपने घर को बेचने से मना कर दिया।

 

दोस्तों हम में से भी अधिकतर लोगो को इस किसान की तरह ही अपने जीवन से कई प्रकार की कंप्लेन होती हैं। हम सोचने हैं, हमारा जीवन सबसे ख़राब हैं, हमारे जीवन में ही सबसे अधिक दुःख हैं। हमारा घर बेकार हैं, हमारी नौकरी बेकार हैं, सब कुछ बेकार हैं। पर क्या आपने कभी अपनी ज़िन्दगी को दुसरो की नजरो से देखने की कोशिश की हैं ? दोस्तों अपनी ज़िन्दगी को कभी दुसरो की नजरो से देखने की कोशिश करो, तब आप पाएंगे कि आपकी लाइफ दुसरो से कितनी अच्छी हैं, आपकी जॉब दुसरो से कितनी अच्छी है, आप दुसरो से कितने बेहतर हैं।

 

तो दोस्तों आज मैंने आपको इस article मे बताया Short Motivational Stories in hindi उम्मीद करता हूं कि आपको ये Article पसंद आया होगा ओर आशा करता हूं कि आपको इससे Motivation मीली होगी। ऐसे और रोचक विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमसे जुड़े रहें और हमारे article पढ़ते रहे।

Short Motivational Stories No 1. दावत और नमाज

शेख सादी ईरान के रहने वाले फारसी के बड़े विद्वान और शायर थे। एक बार उन्हें एक हाकिम ने अपने यहाँ। दावत पर बुलाया। अभी वे खाना खाने बैठे ही थे कि नमाज का वक्त हो गया। शेख सादी हाकिम से माफी माँग कर नमाज के लिए खड़े हो गये।

नमाज अदा करके घर आये तो बीवी से खाना लगाने को कहाबीवी हैरत से उनका मुंह ताकते हुए बोली- “आप तो दावत में गये थे, वहाँ से भूखे ही लौट आये?” शेख सादी ने पूरी घटना सुनाते हुए कहा-अगर मैं नमाज के लिए न उठ खड़ा होता तो भला हाकिम मेरे बारे में क्या सोचता?

इस पर बीवी खाना लगाते हुए बोली-‘खाना तो आप जरूर खाइयेमैं लगा देती हूँ लेकिन मेहरबानी करके नमाज भी फिर से पढ़ लीजिएक्योंकि नमाज तो हुई ही नहीं, दिखावे की जो थी।

 

Also Read:

 

Short Motivational Stories No 2. पत्थर के बदले मीठे फल

 

महाराज रणजीत सिंह एक बार घोड़े पर सवार होकर सैनिकों के साथ कहीं जा रहे थे। अचानक एक पत्थर आकर उनको लगा। पत्थर मारने वाले की तलाश में सैनिक एक वृद्धा चारों ओर दौड़ पड़े। थोड़ी देर में सैनिक को पकड़ कर लायें और कहा-‘इसी दुष्टा ने पत्थर मारा हैं।

महाराज ने पास बुलाकर पत्थर मारने का कारण पूछा । वृद्धा कहा-मेरे बच्चे दिन हैं। घर में ने महाराज दो से भूखे अन्न का एक दाना भी नही है। भोजन की तलाश में घर से निकली तो देखा एक पेड़ फलों से लदा है। मैंने पत्थर मारकर फल गिराने चाहे। इसी बीच एक पत्थर आपको लग गया है। मैं क्षमा चाहती हूँ।

महाराज रणजीत सिंह ने कहा-इसे कुछ आशर्फियाँ देकर छोड़ दो। सेनापति ने चकित होकर कहा-महाराज यह कैसा न्याय! इसे तो सजा मिलनी चाहिये। रणजीत सिंह ने हँसकर उत्तर दिया-पत्थर मारने पर जब पेड़ भी मीठे फल दे सकता है तो मैं मनुष्य होकर उसे क्यों निराश कहूं?

Short Motivational Stories No 3. सीप और मोती

एक सीप कराह रही थी। उसके पेट में मोती था। प्रसव-पीडा उसे कष्ट दे रही थी। कराह का कारण जानने के बाद सीप की सहेली ने संतोष की साँस ली और अपने भाग्य को सराहते हुए कहा कि “मैं मजे में हैं, मुझे पीड़ा का झंझट नहीं सहना पड़ा” एक बूढ़ा केकड़ा कुछ दूर बैठा यह सब देख सुन रहा था।

उसने गर्दन उठाकर देखा और कहा-आज की पीड़ा से एक सीप से सुन्दर मोती की जन्मदात्री बनना है, लेकिन दूसरी का चैन उसे सदा दरिद्र बनाये रखने वाला है। वह क्यों नहीं समझती कि पीड़ा ही कष्ट और चैन ही सुख नहीं है।

Also Read:

Short Motivational Stories No 4. नारद और संगीत

एक बार देवर्षि नारद को अपने संगीत-ज्ञान का बड़ा घमंड हो गया। भगवान ने उन्हें समझाया कि अभी तुम्हारा ज्ञान पूर्ण नही है, फिर भी नारद वाणा पर भगवान का गुण गाते हुए तीनों लोकों में विचरने लगे। एक बार नारद जी विष्णु लोक जा रहे थे। रास्ते में देखा कि कुछ दिव्य स्त्री पुरुष घायल पड़े थे। उनके कुछ अंग कटे हुए थे। नारद जी के पूछने पर वे दुखी स्वर में बोलेहम सभी राग-रागनियाँ है।

पहले हम अंगों से पूर्ण थे। आजकल नारद नाम का एक व्यक्ति उल्टा-सीधा राग-रागनियों का अलाप करता फिरता है, जिससे हम लोगों की यह स्थिति हो गयी है।

विष्णु भगवान ही हमारे कष्टों को दूर कर सकते हैं। नारद जी ने यह बात सुनी तो उदास हो गये। जब वे विष्णु लोक पहुँचे तो प्रभु ने उनकी उदासी का कारण पूछा। नारद जी ने सारी बातें बता दी। भगवान शंकर के वश की बात हैं। नारद जी भगवान शंकर के पास गये। उन्हें सारी ढग बातें बतायी। शंकर जी ने उत्तर दिया-मैं ठीक से राग रागनियों का अलाप करू तो वे नि:संदेह सभी अंगों से पूर्ण  हो जायेंगी। परन्तु मेरे संगीत का श्रोता कोई उत्तम अधिकारी मिलना चाहिये।

अब नारद जी को और क्लेश हुआ, सोचने लगे कि क्या मैं संगीत सुनने का अधिकारी भी नहीं हैं। उन्होंने भगवान शंकर से उत्तम श्रोता चुनने की प्रार्थना की। शिवजी ने भगवान नारायण का नाम निर्देशित कियाशिव लोक में संगीत पमारोह आरम्भ हुआ। सभी देव, गंधर्व और राग रागनियाँ २ हाँ उपस्थित हुईमहादेव जी के राग अलापते ही उनके अं, पूर्ण हो गयेनारद जी साधु हृदय परम महात्मा तो थे ही, उनका अहकार दूर हो गया। वे प्रसन्न हुए तथा शिवजी ने उन्हें विधिवत संगीत शिक्षा दी और वे संगीताचार्य बने।

Short Motivational Stories No 5. पलायन और पलायन

तोक्यों के नगर सेठ कीशो ने बुद्ध पूर्णिमा पर जब अपने घर में उत्सव किया तो जैन मास्टर दोनजेन को भी बुलाया। छत पर सभी लोग चन्द्रोदय की प्रतिक्षा कर रहे थे, तभी एकाएक भूकंप आ गया। सभी लोग नीचे भागे। कीशो ने दोनजेन को आवाज दी। आप भी भागकर सड़क पर आइएगुरु निश्चिय रहे। भूकंप हल्का था, आया और चला गया।

कुछ देर बाद जब सब दोबारा छत पर पहुँचे तो कीशो ने दोनजेन से पूछा आप भागे क्यों नहीं?’ भागा तो में भी था, फक यह है कि जहाँ तुम सब बाहर भागे, मैं भीतर भाग लिया, दोनजेन ने उत्तर दिया।

 

Short Motivational Stories No 6. सार्वजनिक पैसे का महत्व

सन् 1933 का वर्ष था। गाँधी जी हरिजनों के लिए देश भर में दौरा कर रहे थे। जहाँ कहीं भी वे जाते थे, हरिज कोष इकट्ठा थे। के लिए धन करते जो भी रकम आती थी, गाँधी जी के निजी सविच महादेव भाई तभी उसे एक कागज में लिख लेते थे। फिर रात को बैठकर हिसाब करते थे और रोकड मिलाते थे। एक दिन, रात में महादेव भाई हिसाब करने बैठे तो देखा, एक हजार दो रुपये कम हैं। बार-बार हिसाब करते तो मद जहाँ की तहाँ थी। उन्हें 509 की दो थैलियाँ मिली थी, जो गायब थीं। कहाँ गयी और कैसे कोई उड़ा ले गया. ढूंढना कठिन था।

अब क्या करें? महादेव भाई दुखी थे, अब वह कर भी क्या सकते थे? इसका पता जब गाँधीजी को चला तब वह बेझिझक बोले कि यह पैसा महादेव भाई को अपनी जेब से चुकाना होगा। इस पर प्रश्नकर्ता ने कहा बापू, महादेव भाई ने यह रुपया लिया नहीं। तो इससे क्या हुआ। आखिर जिम्मेदारी महादेव की है, यह सार्वजनिक पैसा है। महादेव भाई ने उस घाटे को अपने जेब से भरा।

 

Short Motivational Stories No 7. हक की रोटी

 

एक राजा के यहाँ एक संत आयेप्रसंगवश बात चल पड़ी, हक की रोटी की। राजा ने पूछा-‘महाराज। हक की
रोटी कैसी होती है?’ महात्मा ने बतलाया कि आपके नगर में अमुक बुढ़िया रहती है, उसके पास जाकर पूछो और
उससे हक की रोटी मागना। राजा पता लगाकर उस बुढ़िया के पास पहुँचे और बोले-मुझे हक की रोटी ‘माता! चाहिए’ बुढ़िया ने कहा-‘राजन! मेरे पास एक रोटी है, पर उसमें आधी हक की है और आधी बेहक की।’
राजा ने पूछा-आधी बेहक की कैसे? बुढ़िया ने बताया-‘एक दिन मैं चरखा कात रही थी।

शाम का वक्त था। अधरा हो चला था। इतने में उधर से एक जूलूस निकलाउसमें मशालें जल रही थी। मैं अलग
अपना चिराग न जलाकर उन मशालों की रोशनी में कातती रही और अपनी आधी पूनी कात ली। आधी पूनी पहले की कती थी। उस पूनी से आटा लाकर रोटी बनायी। इसलिए आधी रोटी तो हक की है और आधी बेहक की। इस आधी पर हक । राजा श्रद्धापूर्वक उस जूलूस वाले का हैने सुनकर बुढ़िया को सर नवाया।

 

Short Motivational Stories No 8. वीरता

यह उन दिनों की बात है जब इंग्लैंड में लोग कमर से तलवार बाँधे घूमा करते थे और द्वंद्व युद्ध से इन्कार कर देने वाले को बहुत ही हिकारत की नजर से देखा जाता था। तलवार बाजी में दर्जनों पदक प्राप्त कर, वाल्टर रेले अपने इसी कौशल के कारण महारानी एलिजाबेथ के प्रिय व्यक्तियों में से एक थे। वाल्टर रेले एक दिन पार्क में घूमने निकले, तभी एक दुबले-पतले साधारण से दिखने वाले युवक ने उन्हें तलवारबाजी के लिए ललकारा। वाल्टर रेले ने द्वंद्व युद्ध से इन्कार कर दिया। गुस्से में आकर उस युवक ने उन पर थूक दिया।

वाल्टर रेले ने चुपचाप जेब से रुमाल निकाला और मुँह साफ कर बोले, ‘जिस रुमाल से मैं अपने चेहरे से थूक साफ कर रहा हूँ, उसी से मैं तुम्हारे सीने का खून भी साफ कर सकता हूँ। मेरी तलवार बिना खून पिये म्यान में नहीं जाती। फिर भी मैं तुम्हें माफ कर रहा हूँ क्योंकि मैं हमेशा बराबर वाले से युद्ध करने का पक्षधर हूँ। अपने से कमजोर से मैं कभी नहीं लड़ता।

Short Motivational Stories No 9. अमानत की वापसी

रबी मेहर प्रख्यात पारसी धर्मगुरु थे। एक दिन जब वे पाठशाला में बच्चों को पढ़ा रहे थे तो अकस्मात् उनके दोनों पुत्रों की मृत्यु हो गयी उनकी पत्नी ने मृत पुत्रों के शरीर चादर से ढंक शयनागार में लिटा दिये। रबी मेहर शाम को घर लौटे। पत्नी ने एक गिलास शर्बत लाकर दिया। शर्बत पीते हुए रबी ने पूछा, ‘प्रिये! आज दोनों बच्चे दिखाई नहीं देते।’

धर्मपत्नी ने संतोष की मुद्रा में उत्तर दिया। ‘यहीं कहीं होंगे, लीजिए। भोजन कर लीजिए।’ यह कहकर उसने भोजन का थाल सामने रख दिया। रबी मेहर भोजन करने लगे तो पत्नी ने धीरे से पूछा, ‘कल पड़ोसिन के गहने माँगे थे, आज वह माँगने आयी थी, आप कहें तो उन्हें वापस कर दूं।’

यह भी कोई पूछने की बात है, रबी ने उत्तर दिया, ‘जिसकी वस्तु है वह लेना चाहता है तो देने वाले को दु:ख और संकोच क्यों हो?’

Short Motivational Stories No 10. तूफान और द्वीप

समुद्र में एक विशाल जहाज चल रहा था। वर्षा का । मौसम था। अचानक भीषण तूफान शुरू हो गया। तूफानी लहरों से जहाज डगमगाने लगा।

एक कोने में बैठे हुए कुछ लोग तत्त्व चर्चा कर रहे थे। किन्तु उस समय उनका भी ध्यान विचलित हो गया। जीवन और मृत्यु के संघर्ष में सबके चित्त की स्थिति अस्तव्यस्त हो गयी किन्तु एक ज्ञानी आँख बन्द किये समाधि में लीन था। उसके चेहरे पर तनिक भी घबराहट नहीं थी। कुछ देर के पश्चात् तूफान शान्त हो गया। सभी लोग शान्ति से बैठे हुए उस ज्ञानी मनुष्य से पूछने लगे-‘क्या तुम्हें तूफान का भय नहीं लगा?’ उसने कहा-‘पहले मेरे मन में बहुत तूफान उठा करते थे। किन्तु अब जब भी तूफान आता है, मैं भीतर के विशाल द्वीप में प्रविष्ट हो जाता हूँ, जहाँ बड़ी से बड़ी लहर भी मेरा स्पर्श नहीं कर सकती। द्वीप को मैं धर्म के नाम से संबोधित करता हूँ।

Short Motivational Stories No 11. उचित दण्ड

चोड देश में गोवर्धन नाम का राजा राज्य करता था। वह प्रजा का पालन पुत्रवत् करता। प्रत्येक के सुख-द:ख को अपना सुख-दु:ख समझता। वह बड़ा न्यायप्रिय था। उसने अपने दरबार में सभा मंडप के सामने लोहे के स्तम्भ पर एक घंटा बंधवा दिया था, जिसका नाम न्याय घंटा था। न्याय चाहने वाला उस घंटे को बजा दिया करता। राजा घंटे की आवाज सुनकर समझ जाता। वह सब हाल पूछकर ठीक न्याय करता।

एक बार उसका इकलौता पुत्र रथ पर चढ़कर कहीं बाहर जा रहा था। उसने जान-बूझ कर एक बछड़े को रथ के पहिए से कुचल दिया। जब गाय ने अपना बछड़ा मरा हुआ देखा तो वह डकराती हुई राजदरबार में चली गयी। वहाँ पर पहुँच कर उसने सींग अड़ाकर न्याय-घंटा जोर से बजाया। राजा ने उसके दुःख की पूछताछ की। राजा को सारी बात का पता चल गया। राजा ने अपने राज्य में घोषणा कर दी कि वह अपने इकलौते पुत्र को कल प्रातः ही रथ से कुचल देगा। राजा की इस प्रकार की घोषणा से सभा प्रजाजन दु:खी और भयभीत होने लगे। मंत्रियों तथा दरबारियों ने राजा से निश्चय को बदलने की प्रार्थना की परन्तु राजा ने किसी की भी न सुनी।

राजा ने दूसरे दिन प्रात: ही रथ मँगवाया, पुत्र को सड़क पर लिटा दिया। उसके बाद राजा ने रथ से अपने पुत्र को कुचल कर कहा, ‘वाणी, शरीर और कर्म से प्रजाजन की रक्षा करना और यदि राजा का पुत्र भी प्रजाजनों को वाणी तथा कर्म द्वारा पीड़ित करता है तो उसे सहन न करके पुत्र को उचित दंड देना ‘राजधर्म’ है।’

 

Also Read:

 

5 Responses to “बदलाव लाने वाली कहानियाँ Short Motivational Stories in Hindi For Student”
  1. Buy Contact Lenses November 29, 2017
  2. HindiApni June 17, 2018
  3. Vijay Kumar November 27, 2018
  4. Perfect stories November 27, 2018

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.