पर्वतारोहण पर निबंध Parvatarohan Essay in Hindi @ 2020

हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु Essay on Parvatarohan in Hindi पर पुरा आर्टिकल। आज हम आपके सामने पर्वतारोहणके बारे में कुछ जानकारी लाये है जो आपको हिंदी essay के दवारा दी जाएगी। आईये शुरू करते है Parvatarohan Essay in Hindi

Parvatarohan Essay in Hindi

स्तावना :

मनुष्य तथा प्रकृति का परस्पर गहरा सम्बन्ध है। प्रकृति की गोद में आकर मनुष्य को शान्ति भी मिलती है तथा आनन्द भी मिलता है। तभी तो घुमक्कड प्रवृत्ति के लोग प्रकृति के रहस्यों को जानने के लिए कभी नदियाँ पार करते हैं तो कभी पर्वतों पर चढ़ते हैं। ये कार्य उसे आन्तरिक शान्ति देते हैं।

पर्वतारोहण का परिचय :

पहाड़ों की चोटियों पर चढ़ना ‘पर्वतारोहण’ कहलाता है तथा जो व्यक्ति यह कार्य करता है, उसे ‘पर्वतारोही’ कहते हैं। इस भौतिकवादी युग में जब मनोरंजन के आधुनिक साधन हाथ पसारे मनुष्य को अपनी और बुलाते हैं वहीं कुछ व्यक्तियों के लिए पर्वतारोहण शौक भी है तथा अपने साहस को आजमाने का तरीका भी है। यह कार्य बहुत कठिन तथा जोखिम भरा है तभी तो दृढ़ इच्छा शक्ति तथा संयमी व्यक्ति ही पर्वतरोही बन सकता है।

हिमालय की प्रमुख चोटियों पर विजय प्राप्त करना :

इस दुनिया में साहसी लोगों की कमी नहीं है तभी तो हिमालय की सबसे ऊँची चोटी ‘एवरेस्ट’ पर पहुँचकर संसार के कुछ साहसी लोगों ने अपनी हिम्मत का लोहा मनवाया है। कुछ साहसी लोगों ने ‘कचनगंगा’ पर भी अपनी विजय-पताका फहरायी है। पर्वतारोहण का कार्य अकेले नहीं किया जा सकता, अपितु इस कार्य के लिए दलबल के साथ चलना पड़ता है।

विश्व-प्रसिद्ध पर्वतारोही :

कुछ प्रसिद्ध तथा साहसी पर्वतारोही ऐसे हैं जिनकी गाथाएँ आज भी लोगों को मुँह-जुबानी याद है। इनमें अंग्रेज पर्यटक सर जार्ज एवरेस्ट, हिलैरी, जनरल बूस, हावर्ड वैरी, इर्विन ओल्ड, कर्नल हंट, मैलोरी एवं भारतीय पर्यटक शेरपा तेनसिंह एवं बचेन्द्रीपाल मुख्य हैं। आजकल हर वर्ष अनेक साहसी युवा इस शौक को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

पर्वतारोहण के लिए प्रमुख सामग्री :

पर्वतारोहण करते समय अपने साथ बहुत सी वस्तुएँ ले जानी पड़ती हैं। पर्वतारोही अपने साथ मोटे रस्से (कृत्रिम) हवा, जल, जंगली जीव-जन्तुओं से रक्षा के लिए अस्त्र, तम्बू, औजार, पहाड़ों के नक्शे, कैमरे तथा खाद्य सामग्री आदि लेकर चलते हैं। इसके अतिरिक्त प्राथमिक चिकित्सा सामग्री भी पर्वतारोही अपने साथ ले जाते हैं।

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पर्वतारोहण पर निबंध

मानव का आदि युग से प्रकृति के साथ गहरा सम्बन्ध रहा है। वह इसके साथ रहकर सदैव आनन्द की खोज में लगा रहता है। इसीलिए प्रकृति तथा मानव का आपसी सम्बन्ध अविच्छिन्न रूप से सदा के लिए जुड़ गया है। इसी कारण मानव की प्रवृत्ति घुमक्कड़ किस्म की बन गई है। पर्वतारोहण इसी प्रवृत्ति का अंग 1 पर्वतारोहण से अभिप्राय है पर्वतों के शिखरों पर चढ़ना। आज के यान्त्रिक युग में पर्वतारोहण का शौक मानव के साहस का परिचय तो देता ही है साथ ही उसका मनोरंजन भी करता है। यह शौक बहुत दुर्गम व दुःसाध्य है। भयंकर व कठिन मार्गों को पार कर सीधी ऊँचाई पर शिखर तक पहुँचना वास्तव में जोखिम परा काम है। इस प्रकार के काम केवल साहसी लोग ही कर सकते हैं। हिमालय के सर्वोच्च शिखर ‘एवरेस्ट’ पर विश्व के कुछ साहसी लोगों ने ही सबसे पहले अपने कदम रखे थे।

उसके बाद तो हिमालय के अन्य दुर्गम शिखरों पर अनेक लोग अपनी पद-चाप छोड़ चुके हैं। अभी कुछ समय पूर्व मानव ने कंचनजंगा शिखर पर अपनी कीर्ति पताका फहरायी थी। पर्वतारोहण का साहसिक कार्य कोई भी व्यक्ति अकेले नहीं कर सकता है। इसके शौकीन इस काम के लिए पूरे दलबल के साथ चलते हैं। उनके साथ ऐसे लोग भी होते हैं जिन्हें पर्वतों की कुछ जानकारी होती है।

अपने साथ वे उपयोगी वस्तुएँ व अनिवार्य अन्य सामान ने जाते हैं। पर्वतारोहण के लिए प्रायः उन्हें औजार, मोटे रस्से, जंगली जीव जन्तुओं ने सुरक्षा के लिए अस्त्र, हवा, जल तथा हिम की सामग्री, तम्बू, पर्वतों के मान चैत्र और कैमरे आदि की आवश्यकता पड़ती है। इनके अतिरिक्त ये पर्वतारोही सामान ढोने वाले पहाडी, डॉक्टर, पत्रकार तथा भूगोलवेत्ता को भी साथ ले जाना सिन्द करते हैं।

A विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही जिनके साहस की गाथाएँ सर्वप्रचलित हैं वे हैं – ग्रेज पर्यटक सर जार्ज एवरेस्ट, हावर्ड वैरी, कप्तान हिलैरी, इर्विन ओल्ड, जनरल स, मैलोरी व कर्नल हंट तथा भारतीय पर्यटक शेरपा तेनसिंह और बचेन्द्रीपाल ।

गराज हिमालय भारत का सरताज है। यह पर्वतारोहण के शौकीनों के लिए नाकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। युवा वर्ग प्रतिवर्ष इसके दुर्गम शिखरों पर पहुँच हे हैं। आजकल युवतियाँ भी इस शौक में सम्मिलित होती जा रही हैं। वे भी वकों की भाँति निडर तथा साहसी हैं। प्रायः पर्वतारोहण के शौकीन वे ही लोग ते हैं जो मृत्यु को खेल के समान समझते हैं।

आज से कुछ समय पूर्व कुछ त्साही युवकों ने हिमालय के ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में पद चिन्ह छोड़े थे, जिन्हें पहुँच बाहर माना जाता था।

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