समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध – Essay on Benefits of Newspaper in Hindi

हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध Essay on Benefits of Newspaper in Hindi पर पुरा आर्टिकल। ‘समाचार पत्रों के माध्यम से दुनिया भर के समाचार संग्रहित करके प्रकाशित किए जाते हैं। आधुनिक युग में ये मानव-जीवन का अनिवार्य अंग बन चुके हैं। दुनिया भर की जानकारी प्राप्त करने का इससे सरल तथा सस्ता उपाय कोई दूसरा नहीं है।आइये पढ़ते है समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध

Essay on Benefits of Newspaper (1)

Essay on Benefits of Newspaper in Hindi

प्रस्तावना :

समाचार पत्रों के माध्यम से दुनिया भर के समाचार संग्रहित करके प्रकाशित किए जाते हैं। आधुनिक युग में ये मानव-जीवन का अनिवार्य अंग बन चुके हैं। दुनिया भर की जानकारी प्राप्त करने का इससे सरल तथा सस्ता उपाय कोई दूसरा नहीं है।

समाचार पत्र का उदय काल :

संसार का सबसे पहला समाचार पत्र । ‘पेकिंग गजट‘ नाम से सन् 1640 में प्रकाशित हुआ था। हिन्दुस्तान में समाचार-पत्रों का आगमन अंग्रेजों के आगमन के साथ ही हुआ था। भारत का पहला समाचार पत्र ‘इंडिया गजट’ के नाम से ‘ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा छापा गया था। इसके बाद राजा राम मोहन राय ने ‘कौमुदी’ एवं ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने ‘प्रभाकर’ नामक समाचार पत्र निकाले। फिर तो एक के बाद एक समाचार पत्र विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित होने लगे। सन् 1780 में ‘बंगालगजट’ नामक समाचार पत्र प्रकाशित हुआ।

समाचार-पत्र के विभिन्न रूप :

वर्तमान युग में अनेक प्रकार के समाचार पत्र प्रकाशित होने लगे हैं जैसे दैनिक, साप्तादिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, छमाही तथा वार्षिक इत्यादि। इनमें दैनिक समाचार-पत्र मुख्य हैं क्योंकि इन पत्रों के माध्यम से हम हर दिन पूरी दुनिया के बारे में जानते रहते हैं और हमारा सामान्य ज्ञान भी तरोताजा रहता है।

स्थानीय, प्रान्तीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय सभी प्रकार के समाचार दैनिक समाचार-पत्रों में छपते हैं। नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, वीर अर्जुन, दैनिक जागरण आदि कुछ प्रमुख दैनिक समाचार-पत्र बहुत लोकप्रिय हैं। इनके अतिरिक्त साहित्य, धर्म, खेलकूद, व्यापार, राजनीति, चलचित्र आदि विषयों पर भी समाचार-पत्र प्रकाशित होते हैं।

समाचार-पत्रों के लाभ :

सभी समाचार-पत्र हमारे ज्ञानवर्धन में बहुत सहायक हैं। ये हमारा भरपूर मनोरंजन भी करते हैं क्योंकि इनमें सिनेमा, चलचित्र, कार्टून, कहानियों आदि के बारे में भी खबरें छपती हैं। ये व्यापारियों का व्यापार बढ़ाते हैं तथा विज्ञापनों के माध्यम से जनता को नई वस्तुओं की जानकारी मिलती रहती है। समाचार-पत्रों में स्त्री, बच्चों, बूढ़ों, युवाओं सभी के मनपंसद लेख छपते रहते हैं।

उपसंहार :

वास्तव में समाचार पत्र ‘गागर में सागर’ के समान है। ये सरकार तथा जनता में सम्पर्क सूत्र का काम करते हैं। राजनीतिज्ञों के लिए तो यह सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं। ये समाचार-पत्र ही तो हमारे भखे मस्तिष्क का भोजन है। सुबह चाय की प्याली के साथ समाचार पत्र हमें पूरा दिन तरोताजा रखते हैं।

Essay on Benefits of Newspaper in Hindi

 

समाचार-पत्र जनसाधारण को दैनिक समाचारों से अवगत कराता है। छपाई कला के आविष्कार के बाद समाचार-पत्रों का प्रकाशन आरंभ हुआ। लोगों को देश-विदेश के समाचार ज्ञात होने लगे। लोगों में चेतना और जागरूकता फैली। समाचार-पत्रों का महत्त्व दिनों-दिन बढ़ता गया। भारत में बंगाल गजट’ नाम से पहला समाचार-पत्र छपा। धीरे-धीरे समाचार-पत्रों की संख्या में वृद्धि हुई। आज भारत में सैंकड़ों समाचार-पत्र छपते हैं।

इनमें आम महत्त्व की सभी सूचनाएँ छपी होती हैं। राजनीति, व्यापार, उद्योग, | शिक्षा, खेल-कूद, कृषि, रोज़गार, मनोरंजन, आदि से जुड़ी सूचनाएँ इनमें प्रमुखता से | होती हैं। इनमें विज्ञापनों की भी भरमार होती है। इनमें छपे लेखों से ज्ञानवर्धन होता है। लोग इनमें खबरों को विस्तार से पढ़ते हैं। समाचार-पत्र सस्ते होते हैं इसलिए ये सब लोगों की पहुँच में होते हैं। रेडियो और टेलीविज़न के प्रसार के बावजूद लोग समाचार-पत्रों को उतनी ही रुचि के साथ पढ़ते हैं।

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Essay on Benefits of Newspaper in Hindi

समाचार-पत्र का आविष्कार सर्वप्रथम इटली में हुआ था। तत्पश्चात् अन्य देशों में समाचार-पत्र का प्रकाशन शुरू हुआ। भारत में समाचार-पत्र का प्रकाशन मुगल काल से माना जाता है। हिन्दी में ‘उदन्त मार्तण्ड’ नाम से पहला समाचार-पत्र निकला था। शनैः शनैः भारत में समाचार-पत्रों का विकास हुआ और विभिन्न भाषाओं में समाचार-पत्र प्रकाशित होने लगे। आज नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, जनसत्ता, अमर उजाला आदि समाचार-पत्र अपने पूर्ण विकास पर हैं। ये समाचार-पत्र दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, अर्द्धवार्षिक एव वार्षिक होते हैं। इनका उद्देश्य जाति, धर्म और राष्ट्र का विकास करना होता है। ये समाचार-पत्र जनता में जागरण उत्पन्न करने के साथ ही राष्ट्रीय जागरण का कार्य भी करते हैं। जनमत का निर्माण करके ये लोकतंत्र के सच्चे रक्षक का कार्य करते हैं। राष्ट्रीय अखण्डता की रक्षा करने में भी समाचार-पत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समाचार पत्रों में साहित्यिक, वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक खोज संबंधी-लेख, कहानियाँ, कविताएँ और मीठी, चटपटी तथा कड़वी सभी प्रकार की सामग्री रहती है। इसके अतिरिक्त देश-विदेश के समाचार, व्यापारिक विज्ञापन, विवाहों के विज्ञापन, मृत्यु की सूचना, विभिन्न वस्तुओं के भाव, नौकरियों के विज्ञापन, सभा-समारोहों की सूचना, खेलों, चलचित्रों और मनोरंजन आदि की जानकारी-सब कुछ समाचार-पत्रों में रहता है। इस प्रकार समाचार-पत्रों का सूक्ष्म अध्ययन करने वाला व्यक्ति सामान्य ज्ञान में कभी पीछे नहीं रहता।

समाचार-पत्र मनोरंजन का भी साधन होते हैं। इनमें कहानी, उपन्यास, नाटक, चुटकुले, हास्य-व्यंग्य, विविध कार्टून एवं व्यंग्य-चित्र आदि मनोरंजन का कार्य करते हैं। यात्रा के समय समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएँ यात्रा को मनोरंजक बनाती हैं।

समाचार-पत्रों से व्यापारिक लाभ भी होता है। आयात-निर्यात के समाचार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की वृद्धि में अपना योगदान देते हैं। इससे क्रेता एवं विक्रेता दोनों को ही लाभ होता है।समाचार-पत्र समाज की बुराइयों एवं कुरीतियों को दूर करने में भी सहायक होते हैं। ये समाज में फैली अशिक्षा, दहेज, बाल विवाह आदि कुप्रथाओं का विरोध करके समाज को जाग्रत करते हैं। ये देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनाचार, शोषण और अत्याचार की घटनाओं को प्रकाशित कर असामाजिक तत्वों में भय उत्पन्न करते हैं जिससे अपराध में कमी आती है।

इस प्रकार समाचार-पत्र जनता और सरकार के बीच की कड़ी होते हैं। आज के युग में समाचार-पत्र महत्वपूर्ण शक्ति-स्तंभ माना जाता है। यह लोकतांत्रिक राष्ट्रों की चार प्रमुख शक्तियों में महत्वपूर्ण है।

समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध

समाचार पत्रों के अपने महत्त्व और लाभ हैं। आधुनिक समय में समाचार पत्रों को सूचना, समाचार एवं विचारों के प्रसार का अच्छा माध्यम समझा जाता है। समाचार पत्रों के बहुत से लाभ हैं। समाचार पत्र विश्व के प्रत्येक हिस्से के समाचार हम तक पहुँचाते हैं। किसी ने सच ही कहा है आज का युग ‘प्रेस’ एवं प्रात: कालीन सामाचार पत्र का युग है।

समाचार पत्र आज की दुनिया में लोकमत को प्रतिबिम्बित करता है। सामाचार पत्र द्वारा वास्तविक लोकमत का मापन सम्भव होता है। समाचार पत्रों में बहुत उपयोगी जानकारी अन्तर्विष्ट होती है। लोगों को ने केवल अपने देश बल्कि सम्पूर्ण विश्व के विचारों एवं विचारधाराओं के विषय में जानकारी मिलती है। समाचार पत्रों में हमें देश-विदेश के समाचार पढ़ने को मिलते हैं। सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, साहित्यक एवं धार्मिक घटनाओं की रिर्पोट सभी समाचार पत्रों द्वारा दी जाती है।

समाचार पत्र विश्व के सभी देशों में आपसी भाईचारा एवं सौर्हाद पूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने में सहायक होते हैं। समाचार पत्र विज्ञापन एवं प्रचार का एक अच्छा माध्यम हैं। समाचार पत्रों के स्तम्भों से हमें विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है। कुछ समाचार पत्र हत्या, सेक्स, अपराध, घोटालों, तलाक, अपहरण एवं इस तरह के अन्य विषयों की खबरें छापते हैं। इस तरह के समाचारों के प्रचार प्रसार से पाठकों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। किन्तु समाचार पत्रों के फायदों को देखते हुये इन नुकसानों की अवहेलना की जा सकती है।

आज कल प्रत्येक समाचार पत्र किसी संदेश को प्रतिपादित करता है जबकि उसे निष्पक्ष होकर समाचार छापने चाहिये। कुछ समाचार पत्र अपनी विचारधाराओं का प्रचार करने में लगे हुये हैं। इन विचारों से समाचार पत्र के वास्तविक उद्देश्य को नुकसान पहुँचता है।

समाचार पत्र विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर जनमत को परिवर्तित करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। समाचार पत्र लोगों को शिक्षित करने में भी सहायक होते हैं। वह हमें हमारे कर्तव्यों के विषय में बताते हैं एवं हमारी जिम्मेवारियों का एहसास कराते हैं। देश में व्याप्त कई समस्याओं पर वह अपनी न्यायपूर्ण उचित एवं ईमानदार राय प्रस्तुत करते हैं। इस तरह वह आम जनता का पथ प्रशस्त करते हैं।

शिक्षा के दृष्टिकोण से उनका बहुत महत्त्व है। समाचार पत्र विभिन्न क्षेत्रों में हुयी नवीनतम खोजों, अविष्कारों एवं अनुसंधानों के विषय में रिर्पोटों को प्रकाशित कर सकते हैं। विश्वविख्यात विचारक, लेखक, कवि, वैज्ञानिक, समाज सुधारक, दार्शनिक एवं राजनितिज्ञ, समाचार पत्रों द्वारा प्रसिद्धि पाते हैं। इस तरह समाचार पत्र आधुनिक समाज के महत्त्वपूर्ण आधार हैं। इससे व्यापार एवं व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलता है। यह राष्ट्रीय मत के प्रतीक हैं। इनमें वास्तविक विचार प्रतिबिम्बित होते हैं। संक्षेपतः हम यह कह सकते हैं कि समाचार पत्रों के बहुत विस्मयकारी लाभ हैं।

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समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध

लोकतंत्र में समाचार तथा पत्रिकाओं का काफी महत्त्व होता है। समाचार पत्र लोकमत को व्यक्त करने का सबसे सशक्त साधन है। जब रेडियो तथा टेलीविजन का ज्यादा जोर नहीं था, समाचार पत्रों में छपे समाचार पढ़कर ही लोग देश-विदेश में घटित घटनाओं की जानकारी प्राप्त किया करते थे। अब रेडियो तथा टेलीविजन सरकारी क्षेत्र के सूचना के साधन माने जाते हैं। अतः तटस्थ और सही समाचारों के लिए ज्यादातर लोग समाचार पत्रों को पढ़ना अधिक उचित और प्रामाणिक समझते हैं।

समाचार पत्र केवल समाचार अथवा सूचना ही प्रकाशित नहीं करते वरन् उसमें अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग पन्ने और स्तम्भ (column) निर्धारित होते हैं। पहला पन्ना सबसे महत्त्वपूर्ण खबरों के लिए होता है। महत्त्वपूर्ण में भी जो सबसे ज्यादा ज्वलन्त खबर होती है वह मुख पृष्ठ पर सबसे ऊपर छापी जाती है। पहले पृष्ठ का शेष भाग अन्यत्र छापा जाता है। अखबार का दूसरा पन्ना ज्यादा महत्त्वपूर्ण नहीं होता उसमें प्रायः वर्गीकृत विज्ञापन छापे जाते हैं। रेडियो, टेलीविजन के दैनिक कार्यक्रम, एक-आध छोटी-मोटी खबर इसी पृष्ठ पर छपती हैं। तृतीय पृष्ठ पर ज्यादातर स्थानीय समाचार तथा कुछ बड़े विज्ञापन छापे जाते हैं। चौथा पृष्ठ भी प्रायः खबरों तथा बाजार भावों के लिए होता है। पांचवें पृष्ठ में सांस्कृतिक गतिविधियां और कुछ खबरें भी छापी जाती हैं। आधे चौथाई पृष्ठ वाले विज्ञापन और कुछ समाचार भी इस पृष्ठ पर ही छपते हैं। अखबार का बीचोबीच का भाग काफी महत्त्व का होता है। इसमें ज्वलन्त विषयों से सम्बन्धित सम्पादकीय किसी अच्छे पत्रकार का सामयिक विषयों पर लेख, ताकि सनद रहे जैसे रोचक प्रसंग भी इसी बीच के पृष्ठ पर छापे जाते हैं।

बीच के पृष्ठ के दाहिनी ओर भी महत्त्वपूर्ण लेख, सूचनाएँ एवं विज्ञापन दिए जाते हैं। अगले पृष्ठों पर स्वास्थ्य, महिला मण्डल, बालबाड़ी जैसे स्तंभ होते हैं। अंतिम पृष्ठ से पहले खेल समाचार, जिन्सों तथा सोना चांदी एवं जेवरातों के भाव आदि होते हैं। कुछ अखबार बहुत चर्चित कम्पनियों के शेयर भाव भी अपने पाठकों के लिए छापते हैं। अंतिम पृष्ठ पर पहले पृष्ठ का शेष भाग तथा कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण खबरें तथा आलेख आदि छपते हैं। इस प्रकार पूरे अखबार को सुनिर्धारित स्तंभों के साथ छाप कर पाठकों को सौंपा जाता है। अखबार में बीच में दो चार कॉलम पाठकों की प्रतिक्रिया के लिए भी रखे जाते हैं। नवभारत टाइम्स में पहले पाठकों के विचारों को ‘नजर अपनी अपनी’ के अन्तर्गत छापा जाता था।

अखबार का सम्पादकीय एवं मुख पृष्ठ काफी अच्छा होना चाहिए। कुछ पाठक तो सम्पादकीय तथा मोटी खबरें पढ़ने के लिए ही अखबार खरीदते हैं। कुछ अखबार ऐसे होते हैं जिनमें रिक्तियों, खाली स्थानों की खबरें काफी विस्तार से छापी जाती हैं। ऐसे अखबार संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, इम्पलयामेन्ट एक्सचेंज रोजगार समाचारों की जानकारी को काफी महत्त्व देते हैं। तात्पर्य यह है कि 8-10 पेज के अखबार में न जाने क्या-क्या भरा होता है।

अखबार कई प्रकार के होते हैं-दैनिक, त्रिदिवसीय, साप्ताहिक, पाक्षिक तथा मासिक। कैलीफोर्निया में प्रकाशित हिन्दुइज्म टुडे मासिक समाचार पत्र है जो विश्व भर में हिन्दुओं की गतिविधियों का मासिक लेखा-जोखा छापता है। आमतौर से दैनिक समाचार पत्र ही ज्यादा लोकप्रिय होते हैं। कुछ साप्ताहिक अखबार होते हैं जो पूर सप्ताह की गतिविधियों का लेखा-जोखा छापते हैं।

अखबार के बाद पत्रिकाओं का भी अपना एक विशिष्ट महत्त्व है। पत्रिकाएँ ज्यादातर विषय प्रधान तथा अपने एक सुनिश्चित उद्देश्य को लेकर निकाली जाती है। कुछ पत्रिकाएँ केवल नवीन कथाकारों की कहानियाँ ही छापती हैं। सारिका, माया आदि में पहले कहानियाँ छपा करती थीं। कल्याण, अखण्डज्योति जैसी पत्रिकाएँ धार्मिक विषयों से सम्बन्धित लेख, कविताएँ तथा अनुभव छापती हैं। कई पत्रिकाएँ ज्योतिष जैसे विषयों की जानकारी के लिए ही छापी जाती है। ‘आरोग्य’ जैसी मासिक पत्रिका में योग तथा प्राकृतिक उपचार विषयक सामग्री होती है।

पत्रिकाओं की स्थिति अखबारों से थोड़ा भिन्न होती है किन्तु जो पत्रिकाएँ राजनीति से जुड़ी होती हैं उन्हें अकसर परेशान होना पड़ता है। माया तथा मनोहर कहानियाँ जैसे पत्रिकाएँ हलचल मचाने वाली पत्रिकाएँ हैं। कोई-न-कोई शगुफा छोड़ना इनका काम है। अतएव ऐसी पत्रिकाओं को अपने दृष्टिकोण में सुधार लाना चाहिए।वर्तमान युग में अखबार (समाचार पत्र) एवं पत्रिकाओं का महत्त्व निरंतर बढ़ता जा रहा है। प्रायः प्रत्येक पढ़ा-लिखा व्यक्ति अखबार पढ़ने के लिए उत्सुक अवश्य होता है। इसलिए अखबार तथा पत्रिकाओं के मालिकों एवं सम्पादकों को चाहिए कि वे अपने दायित्व को समझें तथा समाज की सहज उन्नति के लिए सदा सचेत रहकर ऐसी खबरें छापें जो सही और समन्वयवादी हों।

समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध

आज समाचार-पत्र मनुष्य को देश और दुनिया की सूचना देने का ही कार्य नहीं करते, बल्कि वे मनुष्य की आवश्यकता बन गए हैं। पहले देश-विदेश के समाचार जानने के लिए विशेष वर्ग द्वारा ही समाचार-पत्र पढ़े जाते थे। आज शिक्षित उच्च वर्ग ही नहीं, बल्कि मेहनतकश मजदूर, रिक्शा, ठेला चलाने वाला अर्धशिक्षित वर्ग भी समाचार-पत्रों का महत्त्व समझने लगा है। आज के व्यस्त जीवन में मनुष्य के पास समय का अभाव है। लेकिन जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उसे विभिन्न क्षेत्रों से सम्पर्क बनाना पड़ता है। आज समाचार-पत्र मनुष्य को समाज के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से जोड़े रखने का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। मानव जीवन में समाचार-पत्र परिवार के महत्त्वपूर्ण सदस्य के रूप में प्रवेश कर चुके हैं, जिनके एक भी दिन न मिलने पर खालीपन महसूस होता है।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान समाचार पत्रों ने देश में जन-जागरण का महत्त्वपूर्ण कार्य किया था। समाचार-पत्रों में देश भक्ति की भावना जागृत करने वाले लेख एवं कविताएँ पढ़-पढ़कर देश की जनता उत्साहित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में अपना सहयोग देने लगी थी। आज भी समाचार-पत्र लोगों को जागरूक करने का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

लोगों को उनके अधिकारों से अवगत कराने के अतिरिक्त समाचार-पत्र भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों, मंत्रियों आदि का भंडाफोड़ करके लोगों को सचेत भी कर रहे हैं। वास्तव में समाचार-पत्र आम आदमी के मन-मस्तिष्क से बड़े अधिकारियों, मंत्रियों आदि का भय निकालने का महत्त्वपूर्ण प्रयत्न कर रहे हैं, ताकि आम आदमी भ्रष्ट अधिकारियों, मंत्रियों के विरोध में आवाज उठा सके। निस्संदेह समाचार-पत्रों ने मानव समाज को अत्याचार का विरोध करने का साहस प्रदान किया है।

मानव-समाज को जागरूक करने के अतिरिक्त आज समाचार-पत्र लोगों को विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित भी कर रहे हैं। समाचार-पत्रों के माध्यम से लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में हो रही प्रगति की जानकारी ही नहीं मिल रही, बल्कि उन क्षेत्रों में प्रवेश के मार्ग भी दिखाए जा रहे हैं। आज रोजगार के लिए युवा-पीढ़ी समाचार-पत्रों से पर्याप्त जानकारी प्राप्त कर सकती है। विभिन्न क्षेत्रों के संस्थान और योग्य उम्मीदवारों के मध्य समाचार-पत्र सेतु का कार्य कर रहे हैं। समाचार-पत्रों के माध्यम से आज शिक्षित युवा-पीढ़ी को देश-विदेश में नौकरी के अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण की जानकारी मिल रही है। देश-विदेश में व्यापार के आदान-प्रदान के लिए भी समाचार-पत्र सशक्त माध्यम बन रहे हैं।

आज मानव रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी समाचार-पत्रों पर निर्भर हो गया है। विशेषकर विस्तार लेते जा रहे नगरों, महानगरों में सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों की जानकारी, विभिन्न उत्पादों की खरीदारी आदि के लिए लोगों को समाचार-पत्रों की सहायता लेनी पड़ती है। प्रतियोगिता के इस युग में विभिन्न उत्पादों की कम्पनियाँ भी समाचार-पत्रों के माध्यम से अपने उत्पादों की विशेषताएँ ग्राहकों को बता रही हैं। ग्राहकों को घटिया उत्पादों की जानकारी भी समाचार-पत्रों से मिल रही है। आज ग्राहक किसी भी प्रकार की खरीदारी के लिए स्वयं निर्णय लेने से पूर्व समाचार-पत्रों के दिशा-निर्देश पर विचार करता है।

आधुनिक मानव-समाज में समाचार-पत्र इतने अधिक महत्त्वपूर्ण हो गए हैं कि एक मित्र की भाँति वे सामाजिक रिश्ते बनाने का कार्य भी कर रहे हैं। आज देश-विदेश में रोजगार अथवा नौकरी के कारण मनुष्य अपने सम्प्रदाय अथवा जाति-बिरादरी से दूर रहने पर विवश है। ऐसी स्थिति में मनुष्य को विवाह-सम्बंधों के लिए समाचार-पत्रों की सहायता लेनी पड़ रही है। समाचार-पत्रों के वैवाहिक विज्ञापनों के द्वारा आज अधिकाधिक विवाह सम्पन्न हो रहे हैं। बल्कि पहले जाति-बिरादरी में सीमित सम्बन्धों के कारण वर-वधू खोजने के सीमित अवसर हुआ करते थे। आज वैवाहिक विज्ञापनों के द्वारा योग्य वर- वधू के अधिक अवसर मिल रहे हैं।

वास्तव में समाचार-पत्र आज मानव जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मनुष्य जीवन की अधिकांश आवश्यकताओं के लिए समाचार-पत्रों पर निर्भर हो गया है। स्पष्टतया समाचार पत्रों के अभाव में आज मानव-जीवन सूना है।

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समाचार-पत्रों से लाभ पर निबंध

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसके हृदय में कौतूहल और जिज्ञासा दो ऐसी वृत्तियां हैं जिनसे प्रेरित हो यह अपने आसपास समेत विश्व में कहां क्या घटित हो रहा है उन घटनाओं से परिचित होना चाहता है। वर्तमान में ऐसा कोई भी देश नहीं है जहां कुछ न कुछ न हो रहा हो। यह राजनीतिक, सामाजिक या फिर आर्थिक किसी भी रूप में हो सकता है। विज्ञान के इस युग में नये-नये आविष्कार या अनुसंधान रोजना हो रहे हैं। इन सबको जानने का सबसे सस्ता साधन है समाचार पत्र ।

यह विश्व में घटित घटनाओं का दस्तावेज भी कहलाता है। आज से तीन शताब्दी पहले तक लोगों को समाचार पत्रों के बारे में ज्ञान नहीं था। संदेशवाहक ही समाचार एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे। समाचार पत्रों का जन्म इटली के वेनिसनगर में तेरहवीं शताब्दी में पहला समाचार पत्र अस्तित्व में आया। समाचार पत्र के शुरुआत को लेकर कोई मतैक्य नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि पहला समाचार पत्र 1609 में जर्मनी से प्रकाशित हुआ जबकि कुछ लोगों का मानना है कि पहला समाचार पत्र सातवीं शताब्दी में चीन से प्रकाशित हुआ। जर्मनी के बाद ब्रिटेन में 1662 में समाचार पत्र के प्रकाशन का पता चलता है।

भारत में 1834 में इंडिया गजट के नाम से समाचार पत्र प्रकाशित हुआ। भारत में अंग्रेजों के आगमन से मुद्रण कला में हुई प्रगति के साथ-साथ भारत में भी समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू हुआ। भारत से प्रकाशित पहले समाचार पत्र का नाम ‘इंडिया गजट’ था। इसके बाद हिन्दी का पहला साप्ताहिक समाचार पत्र 30 मई 1826 को प्रकाशित हुआ। ‘उदन्त मान्डि’ के नाम से प्रकाशित यह समाचार पत्र साप्ताहिक था। इसके बाद राजा राममोहन राय ने कौमुदी’ और ईश्वर चंद्र ने ‘प्रभाकर’ नामक पत्र निकाले। इनके बाद तो एक-एक कर कई समाचार पत्रों का प्रकाशन शुरू हो गया। आज करीब पचास हजार दैनिक, साप्ताहिक सहित समाचार पत्रों का प्रकाशन देश भर में हो रहा है।

समाचार पत्र ही एक ऐसा साधन है जिससे लोकतंत्रात्मक शासन प्रणाली फली-फूली। समाचार पत्र शासन और जनता के बीच माध्यम का काम करते हैं। समाचार पत्रों की आवाज जनता की आवाज कही जाती है। विभिन्न राष्ट्रों के उत्थान एवं पतन में समाचार पत्रों का बड़ा हाथ होता है। एक समय था जब देश के निवासी दूसरे देशों के समाचार के लिए भटकते थे। अपने ही देश की घटनाओं के बारे में लोगों को काफी दिनों बाद जानकारी मिल पाती थी। समाचार पत्रों के आने से आज मानव के समक्ष दूरी रूपी कोई दीवार या बाधा नहीं है। किसी भी घटना की जानकारी उन्हें समाचार पत्रों से प्राप्त हो जाती है।

विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के बीच की दूरी इन समाचार पत्रों ने समाप्त कर दी है। मुद्रण कला के विकास के साथ-साथ समाचार पत्रों के विकास की कहानी भी जुड़ी है। वर्तमान में समाचार पत्रों का क्षेत्र अपने पूरे यौवन पर है। देश का कोई नगर ऐसा नहीं है जहां से दो-चार समाचार पत्र प्रकाशित न होते हों। समाचार पत्र से अभिप्राय समान आचरण करने वाले से है। इसमें क्योंकि सामाजिक दृष्टिकोण अपनाया जाता है इसलिए इसे समाचार पत्र कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि भारतीय लोकतंत्र का चौथा स्थान समाचार पत्र है। समाचार पत्र निकालने के लिए कई लोगों की आवश्यकता होती है। इसलिए यह व्यवसाय पैसे वाले लोगों तक ही सीमित है। किसी भी समाचार पत्र की सफलता उसके समाचारों पर निर्भर करती है। समाचारों का दायित्व व सफलता संवाददाता पर निर्भर करती है। समाचार पत्र एक ऐसी चीज है जो राष्ट्रपति भवन से लेकर एक खोमचे तक में देखने को मिल जाएगा। समाचार पत्रों के माध्यम से हम घर बैठे विश्व के किसी भी कोने का समाचार पा लेते हैं।

समाचार पत्र छपने से पहले कई चरणों से गुजरता है। सबसे पहले संवाददाता समाचार लिखता है। इसके बाद उप संपादक या संपादकीय विभाग से कर्मचारी उसका संपादन करते हैं। इसके बाद उसे कंपोजिंग के लिए भेजा जाता है। कंपोजिंग के बाद उसका प्रूफ पढ़ा जाता है। इसके बाद पेज बनता है। पेज बनने के बाद उसे छपने के लिए मशीन विभाग में भेजा जाता है। इस प्रकार समाचार पत्र छपने के बाद उसे सड़क, हवाई तथा रेल मार्ग से विभिन्न स्थानों को भेजा जाता है। समाचार पत्रों से हमें जहां विश्व भर की घटनाओं की जानकारी मिलती है वहीं इसमें अपना विज्ञापन देकर व्यवसायी लोग अपना व्यापार भी बढ़ाते हैं। इनमें विज्ञापन देने से हर तबके में मध्य आप अपने उत्पाद का प्रचार कर सकते हैं। समाचार पत्रों में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ विशेष अवश्य होता है। इसमें महिलाओं से लेकर बच्चों तक के लिए सामग्री प्रकाशित होती है। समाचार पत्रों के माध्यम से हमें राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा खेलों, फलों व सब्जियों के भाव, रेलवे आरक्षण, परीक्षा परिणाम, विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश सम्बन्धी जानकारी भी प्राप्त होती है। समाचार पत्र दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक या फिर त्रैमासिक हो सकता है। इनमें दैनिक, सांध्य, साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक प्रमुख हैं। रोजाना छपने वाले अखबार दैनिक कहलाते हैं। रोजाना अपराह्न प्रकाशित होने वाले अखबार सांध्य दैनिक कहलाते हैं। इनके अतिरिक्त सप्ताह में एक बार छपने वाला साप्ताहिक तथा पन्द्रह दिनों में एक बार छपने वाला समाचार पत्र पाक्षिक कहलाता है।

हमारे देश में समाचार पत्र हिन्दी, अंग्रेजी, बंगाली, पंजाबी, मराठी, तमिल, तेलगू तथा संस्कृत भाषाओं में छपते हैं। हिन्दी के बड़े दैनिक समाचार पत्रों में नवभारत टाइम्स, दैनिक हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण तथा पंजाब केसरी प्रमुख हैं। इनके अलावा अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, स्टेट्स मैन, पाइनियर, एशियन ऐज आदि प्रमुख दैनिक समाचार पत्र हैं। इनके अलावा हजारों ऐसे समाचार पत्र हैं जिनकी प्रसार संख्या ज्यादा नहीं है या फिर वे क्षेत्रीय समाचार पत्र हैं। उन सबकी जानकारी देना संभव नहीं है।

समाज, राजनीति में व्याप्त कुरीतियों को दूर कराने में समाचार पत्र काफी सहायक सिद्ध हुए हैं। सरकारी नीति व नौकरशाहों द्वारा किये जा रहे घोटालों का पर्दाफाश समाचार पत्र ही करते हैं। विचारों को स्पष्ट और सही रूप में प्रस्तुत करने का समाचार पत्र से कोई और अच्छा साधन नहीं हो सकता। वर्तमान में विचारों की प्रधानता है। समाचार पत्रों से जहां लाभ हैं वहां हानियां भी हैं। पिछले कुछ वर्षों से समाचार पत्रों का किसी न किसी राजनीति दल से गठजोड़ देखने को मिल रहा है। राजनीतिक दलों से गठजोड़ करने वाले समाचार पत्र उनकी नीतियों और विचारों को प्रमुखता से प्रस्तुत करते हैं। इनके अलावा समाचार पत्र के संवाददाता भी कई बार राजनीति से प्रेरित हो किसी समाचार को राजनीतिक रंग दे देते हैं।

समाचार पत्रों के लाभ यह है कि इनमें एक तरफ समाचार जहां विस्तृत रूप से प्रकाशित होते हैं वहीं इनमें छपी सामग्री को हम काफी दिनों तक संभाल कर रख सकते हैं। दूरदर्शन या टीवी चैनलों द्वारा प्राप्त समाचारों से संबंधित जानकारी हम भविष्य के लिए संभाल कर नहीं रख सकते हैं। इसके अलावा यह क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित होने के कारण जो लोग हिन्दी या अंग्रेजी नहीं जानते उन तक को समाचार उपलब्ध करवाते हैं।

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