कर्त्तव्य पालन पर निबन्ध kartavya palan par nibandh Essay on Duty in Hindi

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हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु कर्त्तव्य पालन पर निबन्ध पर पुरा आर्टिकल। र्त्तव्य पालन की महत्ता अपरम्पार है जिसका जीवन के हर कदम पर महत्त्व है। कर्त्तव्य-पालन से विमुख रहने वाला व्यक्ति अपने अधिकार पाने का भी अधिकारी नहीं रह पाता है। जो व्यक्ति कर्त्तव्य-पालन से निपुण होता है, आईये शुरू करते है Essay on Duty in Hindi

kartavya palan par nibandh

कर्त्तव्य पालन पर निबन्ध

हमारे सामने जो काम मौजूद है, वही हमारा कर्तव्य है। छोटे-से-छोटे काम को भी अच्छी तरह से करने की आवश्यकता होती है। यदि मन लगाकर, उत्साह से और चतुराई से काम न किया जाए तो काम बिगड़ जाया करता है। कर्तव्यपालन घर से शुरू होता है। बालक के माता-पिता के प्रति कुछ कर्तव्य हैं । माता-पिता के बच्चों के प्रति कर्तव्य हैं। इसी तरह पति-पत्नी के आपस में कर्तव्य हैं । भाई-भाई के और भाई-बहन के परस्पर कर्तव्य हैं। घर में जो कर्तव्यपालन भली- भाँति करता है उसी में बाहर के कर्तव्यपालन की शक्ति आती है

घर के बाहर मित्रों के प्रति हमारे कुछ कर्तव्य होते हैं। पड़ोसियों के प्रति कुछ कर्तव्य होते हैं। इन कर्तव्यों का पालन करने से मनुष्य की उन्नति होती है। जो मुहल्ले के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करता है, उसे मुहल्ला चाहने लगता है। मुहल्ला उसी को अपना नेता मान लेता है। इसी तरह नागरिकता के कुछ कर्तव्य होते हैं। सरकार को टैक्स समय पर देने वाला सच्चा नागरिक या नेक शहरी कहलाता है।

हम सबके मन में एक शक्ति होती है। वह हमें अच्छे कामों में लगाती है और बुरे कामों से रोकती है। हम कर्तव्यपालन करते हैं तो हमें बड़ी खुशी होती है। यदि हम कर्तव्यपालन से चूक जाते हैं तो हमें बड़ी निराशा होती है । हमारा मन पहली बार ही हमें ठीक कर्तव्य बतला देता है। यदि फिर हम मन की बात को दबाकर बुरे काम में लगें तो हमारा अपना ही दोष है।

संसार में उन्हीं लोगों को सबसे अधिक सम्मान मिलता है, जो अपने कर्तव्य का ठीक तरह से पालन करते हैं। जिस जाति के लोग कर्तव्यपालन करने की आदत बना लेते हैं, वह जाति अवश्य उन्नति करती है। जिस जाति के लोग कर्तव्यपालन से जी चुराते हैं वह जाति नीचे गिर जाती है।

कर्तव्यपालन करने वाले मनुष्य के वचन और बर्ताव में सचाई होती है । वह एक मजबूत चट्टान पर खड़ा होता है, उसे गिरने का भय नहीं होता । कर्तव्यपालन करने वाला अपने हर एक काम को ठीक ढंग से और उचित समय पर करता है। जो कर्तव्यपालन नहीं करता उसे सौ बहाने बनाने पड़ते हैं। उसे झूठ का आसरा लेना पड़ता है। झूठ की माँ कायरता है। समय पर अपना कर्तव्यपालन करते रहने से काम आप-से- आप सफल होने लगते हैं। सफलता की आदत पड़ जाती है। कर्तव्यपालन करने की आदत वाला लगातार और हर एक काम में सफल होता जाता है । वह उन्नति ही करता जाता है।

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प्रस्तावना :

संसार में प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य भी होते हैं। अपनी शक्ति, इच्छाशक्ति तथा सामर्थ्य के अनुसार कार्य करना ही कर्तव्य पालन कहलाता है। यदि अधिकार और कर्त्तव्य साथ-साथ चलते हैं तो समाज में सुव्यवस्था बनी रहती है। मानव के अतिरिक्त प्रकृति, जीव-जन्तु भी तो अपना कर्त्तव्य पालन करते हैं, तभी तो प्रकृति हमारा जीवन सुन्दर बनाती है हमें अन्न-धन देती है। पशु-पक्षी भी अपना कर्तव्य भली-भाँति करते हैं फिर हम तो इन्सान हैं। कर्तव्य-पालन करने से ही जीवन में सच्चरित्रता जैसे गुणों का विकास सम्भव है।

मानवजीवन में कर्त्तव्य पालन की उपयोगिता :

जन्म लेते ही हमारे कर्तव्य प्रारम्भ हो जाते हैं लेकिन समय के साथ-साथ हमारे इन कर्त्तव्यों में परिवर्तन होता रहता है। कर्त्तव्यों का भली-भाँति पालन करने से ही हमारा जीवन उल्लास, उमंग, शान्ति एवं यश से परिपूर्ण हो सकता है। जब तक हम किसी के लिए कुछ करेंगे नहीं, तो वह हमारे गुणों की प्रशंसा कैसे करेगा। गुणों का विकास भी प्रशंसा द्वारा ही होता है। इसलिए कर्त्तव्यों का पालन करने से ही गुणों में निखार आता है। बचपन में माता-पिता, गुरुजनों की आज्ञापालन हमारा कर्तव्य होता है।

विद्यार्थी जीवन में गुरुओं तथा अपने सहपाठियों के साथ हमारे कर्त्तव्य जुड़ जाते हैं। युवावस्था में अपने पड़ोसियों, नाते-रिश्तेदारी के अतिरिक्त राष्ट्र के साथ भी हमारे कर्त्तव्य जुड़ जाते हैं। गृहस्थ जीवन तो कर्त्तव्यों को निभाने का सबसे मुश्किल दौर होता है और फिर बच्चों के बड़े हो जाने पर भी हमारे कर्त्तव्य समाप्त नहीं होते। वास्तव में कर्त्तव्य हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक चलते हैं। परिवार, समाज, देश, तथा संसार की उन्नति के लिए किए गए कार्य ही कर्त्तव्य-पालन हैं।

प्रकृति एवं कर्त्तव्य पालन :

कर्त्तव्य पालन का उत्तरदायित्व मनुष्य के कन्धों पर ही नहीं होता, वरन् प्रकृति में भी कर्त्तव्य की भावना बहुत तीव्र होती है। सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्र, विभिन्न ऋतुएँ नित्यप्रति अपने कर्तव्य का पालन करते हुए संसार को आलोकित करते हैं। निःसन्देह प्रकृति ने ही मनुष्य को कर्त्तव्य बोध कराया है, कर्त्तव्य पालन से अवगत कराया है।

कर्तव्य पालन के लाभ :

कर्त्तव्य पालन को यदि अपना उत्तरदायित्व समझकर निभाया जाए तो हमें उसके अनेक लाभ दिखाई देंगें। कर्तव्य पालन करने वाला व्यक्ति मन का स्वच्छ एवं सरल होता है तथा निडर व साहसा होता है। सबसे बड़ी बात उसका कोई शत्रु नहीं होता, वरन् मित्र ही मित्र होते हैं। हमारा इतिहास कर्त्तव्य परायण लोगों के अनेक उदाहरणों से भरा पड़ा है। पन्नाधाय ने अपने कर्तव्य पालन के लिए अपने पुत्र को बलिदान दे दिया था।

महाराणा प्रताप ने अनेक कष्टों को सहने के बावजूद भी मुगल सम्राट अकबर के सामने नहीं झुके थे। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का तो जीवन ही कर्तव्यों के लिए था तभी तो अपने कर्त्तव्य पालन के लिए अपनी पत्नी सीता का भी त्याग कर दिया था। महात्मा गाँधी, सुभाष चन्द्र बोस, चन्द्रशेखर, जवाहरलाल नेहरु, भगत सिंह सभी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन नैया को पार कर गए थे।

उपसंहार :

कर्त्तव्य पालन की महत्ता अपरम्पार है जिसका जीवन के हर कदम पर महत्त्व है। कर्त्तव्य-पालन से विमुख रहने वाला व्यक्ति अपने अधिकार पाने का भी अधिकारी नहीं रह पाता है। जो व्यक्ति कर्त्तव्य-पालन से निपुण होता है, उसकी यशगाथा की सुगन्ध सर्वत्र फैल जाती है। सभी उसका आदर करते हैं तथा उसकी बात मानते हैं।

इसलिए यदि हम घर, समाज, राष्ट्र तथा संसार सभी की सर्वांगीण उन्नति चाहते हैं तो हमें यह देखना चाहिए कि हमने किसी के लिए क्या किया है, यह नहीं कि किसी ने हमारे लिए क्या किया है। ऐसी सोच होने पर कठिनाईयां अपने आप दूर हो जाएगी।

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Written by

Romi Sharma

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