Essay on Tiranga in Hindi – राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा @ 2019

हेलो दोस्तों आज फिर में आपके लिए लाया हु एक और essay का article इसमें हम आपको बातयेंगे Essay on Tiranga in Hindi में जिससे आप पूरी तरह से उसको समझ सके और अपने बच्चो को पढ़ा सके। आजकल हिंदी भाषा का परियोग सिर्फ स्कूल तक ही सीमित हो गया है क्योकि इंग्लिश ने हर जगह अपना स्थान बना लिया है लेकिन हिंदी भाषा का विषय स्कूलों में होना इससे अभी तक बचया हुवा है। तो निचे दिए गए है Essay on Tiranga in Hindi के कई प्रकार जैसे की 100 ,200 ,300 ,400 ,500 ,600 शब्दो के निबंध जो आप अपनी जरूरत के अनुशार यूज़ कर सकते है।

 

Essay on Tiranga in Hindi

essay on Tiranga

प्रस्तावना

अतः हम सब भारतीयों का यह कर्तव्य है कि हम सदा ही इसके गौरव को बनाए रखने के लिए जिएँ तथा इसके गौरव के लिए मरें। इसकी रक्षा करना हमारा सबसे बड़ा धर्म है। हम सबको यह प्रण करना चाहिए कि हम कभी भी इसको झुकने नहीं देंगे।

प्रत्येक राष्ट्र का अपना ‘राष्ट्रीय ध्वज होता है। यही राष्ट्रीय ध्वज उस देश के गौरव व सम्मान का प्रतीक होता है। भारतवर्ष पहले अंग्रेजों का गुलाम था लेकिन 15 अगस्त, 1947 को स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा’ कहलाया। इसी राष्ट्रीय ध्वज की आन, बान और शान को जीवित रखने के लिए हमारे वीर सपूतों ने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था।

तिरंगे के तीन रंगों का महत्व :

हमारे राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग हैं। सबसे ऊपर वाला रंग केसरिया है जो त्याग की भावना का प्रतीक है। त्याग की भावना हमारे देश में वर्षों से चली आ रही है और इसी त्याग-भावना के वशीभूत होकर हमारे लाखों वीरों ने देश के लिए अपने प्राण त्याग दिए थे। ध्वज के मध्य में सफेद रंग होता है।

सफेद रंग शान्ति तथा पवित्रता की भावना की ओर संकेत करता है। हमारा देश महात्मा बुद्ध, गाँधी जी तथा अशोक जैसे शान्तिप्रिय लोगों की भूमि है। सबसे नीचे हरा रंग होता | है, जो खुशहाली तथा हरियाली का प्रतीक है।

हम सभी चाहते हैं कि हमारे देश के खेत-खलिहान सदा ही हरे-भरे रहें तथा लहलहाते रहें, तथा देशवासी भी हरे रंग की भाँति खुशहाल रहें। हरा रंग इन्हीं बातों की ओर संकेत करता है। बीच में सफेद रंग वाले भाग पर एक चक्र है, जो ‘अशोक चक्र’ कहलाता है तथा जिसमें चौबीस तीलियाँ होती हैं, यह अशोक चक्र नीले रंग का होता है।

‘अशोक चक्र’ का अपना विशेष महत्व है। सम्राट अशोक महान आदर्शवादी सम्राट थे, जो सत्य, अहिंसा, दया तथा प्रेमभाव के पुजारी थे। अशोक चक्र भारतीयों की इसी भावना को प्रदर्शित करता है।

राष्ट्रीय झंडे का महत्व :

हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमारी स्वतन्त्रता की कहानी बयान करता है। यह भारतवासियों के नाम तथा देश की शान का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमें देश पर कुर्बान होने की भावना से ओत-प्रोत करता है। यह हमें हमारे शहीदों के बलिदान की कहानी याद दिलाता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमें भाईचारे, प्रेम, सद्भाव, मैत्री तथा त्याग का संदे, देता है।

राष्ट्रीय ध्वज के प्रति हमारा कर्तव्य :

हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमारे सम्मान का प्रतीक है इसलिए इसके सम्मान के प्रति भी कुछ नियम निश्चित कि गए हैं। इस ध्वज को कहीं भी जमीन पर या मेज इत्यादि पर नहीं बिछाया जाना चाहिए। यह कुछ विशेष स्थानों पर ही फहराया जा सकता है। इसे कभी भी छाती से नीचे नहीं पहनना चाहिए। जब कभी भी झंडा फहराया जा रहा हो, हमें सीधे खड़े हो जाना चाहिए तथा कभी भी इसे गन्दी जगहों पर नहीं फेंकना चाहिए।

राष्ट्रीय विज हमारे राष्ट्रीय त्यौहारों पर जैसे स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस, गाँधी जयन्ती आदि पर देश की ऐतिहासिक इमारतों पर फहराया जाता है। लेकिन यदि किसी राजनेता की मृत्यु हो जाती है तो राष्ट्रीय ध्वज को झुका दिया जाता है।

अतः हम सब भारतीयों का यह कर्तव्य है कि हम सदा ही इसके गौरव को बनाए रखने के लिए जिएँ तथा इसके गौरव के लिए मरें। इसकी रक्षा करना हमारा सबसे बड़ा धर्म है। हम सबको यह प्रण करना चाहिए कि हम कभी भी इसको झुकने नहीं देंगे।

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Essay on Tiranga in Hindi

प्रत्येक राष्ट्र की नीति अन्य राष्ट्रों से पृथक् और विशिष्ट होती है। उसमें कई बातें ऐसी भी होती हैं, जो केवल उसी राष्ट्र की रीति-नीति में पाई जाती हैं। प्रत्येक राष्ट्र का प्रतीक राष्ट्रध्वज अन्य सब राष्ट्रों से पृथक् और विशिष्ट होता है। किसी भी देश का राष्ट्रध्वज अपने पूरे देश का प्रतीक होता है।

किसी राष्ट्रध्वज में राष्ट्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परंपराओं तथा भावनाओं का समावेश होता है। यही कारण है कि कपड़े का यह टुकड़ा पूरा राष्ट्र बन जाता है। इसकी परंपरा की प्राचीनता ‘गरुड़ ध्वज, ‘कपि ध्वज’ आदि पौराणिक नामों से स्पष्ट हो जाती है। पुराणकाल के बाद गुप्त साम्राज्य की विजयिनी वैजयंती और सम्राट् अशोक के धर्म-विजय की पताका, वीर शिवाजी का भगवा ध्वज आदि इतिहास के पन्नों पर आज भी गर्व से फहरा रहे हैं।

ब्रिटेन का यूनियन जैक का हँसिया–बालीवाला झंडा, पाकिस्तान का आधे चाँद एवं तारे का झंडा आदि अपने-अपने राष्ट्र के गौरव के प्रतीक हैं। जब कोई विजेता किसी देश को जीत लेता है तब वह अपने राष्ट्र का झंडा उस विजित देश के राजकीय भवनों पर लगा देता है। इससे लोगों की समझ में अपने आप आ जाता है कि फलाँ देश पर अमुक राष्ट्र अथवा व्यक्ति का आधिपत्य है।

अपने देश के अथवा विदेश के किसी महापुरुष के निधन पर राष्ट्रध्वज झुका दिया जाता है, जिसका अभिप्राय शोक का प्रदर्शन होता है। ऐसे ही राष्ट्रीय पर्वो के अवसर पर राष्ट्रध्वज नए सिरे से सजाकर हर्षोल्लास के साथ फहराकर राष्ट्र के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया जाता है। हाथीदाँत अथवा कीमती धातु पर बने राष्ट्रध्वज दूसरे देशों के महान् व्यक्तियों को भेंट करने की प्रथा भी प्रचलित है।

तिरंगा हमारे देश का राष्ट्रध्वज है और उसके बीचोबीच चौबीस तीलियों वाला चक्र अंकित है। आजादी की लड़ाई के दौरान तिरंगे झंडे का जन्म हुआ था। आरंभ में लाल, हरा और सफेद-इन तीन रंगों का मिश्रण था और सफेद कपड़े पर चरखा अंकित था। चरखे का अभिप्राय स्वावलंबन से था। लाल, हरा, सफेद-ये तीन रंग भी हिंदू, मुसलिम और अन्य भारतवासियों की संस्कृति के प्रतीक थे।

बाद में इसमें कुछ सुधार किया गया। लाल रंग की जगह केसरिया स्वीकार किया गया, चरखे की जगह चक्र अंकित किया गया। रंगों की व्याख्या पहले वर्ग के आधार पर की जाती थी, अब मानव के भौतिक गुणों से उसका संबंध जोड़ा जाता है। केसरिया को साहस और त्याग, सफेद को शांति और सच्चाई तथा हरे को श्रद्धा, प्रगति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इन सबसे बढ़कर तिरंगे झंडे का महत्त्व भारतीयों में जागृति और स्फूर्ति का संचार करने में है।

आज स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय पर्वो पर राष्ट्राध्यक्षों एवं अधिकारियों द्वारा तिरंगा झंडा फहराकर इसका सम्मान किया जाता है। देश के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह तिरंगे की शान बनाए रखे और इसे पूरा सम्मान दे।

 

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