Essay on Red Fort in Hindi – लाल किला पर निबंध 2019

हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु Essay on Red Fort in Hindi पर पुरा आर्टिकल। आज हम आपके सामने लालकिला के बारे में कुछ जानकारी लाये है जो आपको लालकिला के बारे में बहुत सी नयी पुराणी जानकारी का पता चलेगा। आइये पढ़ते है लाल किला पर निबंध

Essay on Red Fort in Hindi

लाल किला पर निबंध

प्रस्तावना :

दिल्ली का लालकिला भारत का एक प्राचीन ऐतिहासिक स्मारक है। यह यमुना नदी के दाएं किनारे पर स्थित है। हजारों वर्ष बीत जाने पर भी लालकिले की आन, बान और शान वैसी ही है।

तिथि-परिचय :

सन् 1638 ई. में मुगल सम्राट शाहजहाँ ने लालकिले को लाल पत्थरों से बनवाया था। इसको बनने में बहुत साल लगे थे, हजारों मजदूरों ने दिन रात काम किया था और लाखों रुपए खर्च हुए थे। शाहजहाँ ने लाल किले को अपने रहने तथा अपनी सुरक्षा के लिए बनवाया था इसलिए यह सम्पूर्ण सुख-सुविधाओं से पूर्ण था।

लालकिले की बनावट :

लालकिले की बनावट अवर्णनीय है जिसमें प्राचीन वास्तुकला का सजीव चित्रण है। इसकी बाहरी दीवारें बहुत ऊँची हैं। इसके चारों ओर चौड़ी खाई हैं। इसके दो मुख्य द्वार हैं। टिकट लेकर मुख्य द्वार ‘लाहौरी गेट’ द्वारा प्रवेश करते हैं। इसके दोनों ओर दुकानें हैं। आगे चलकर दीवान-ए-आम’ है, जहाँ पर मुगल सम्राट दरबार लगाते थे। इसके सामने शाहजहाँ के सिंहासन ‘तखत-ए-ताउस’ अर्थात् ‘मयूर सिंहासन’ की चौकी है। पहले यह मयूर-सिंहासन हीरे-जवाहरातों से जडित होता था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने अपने शासनकाल में उन्हें निकलवाकर रंग-बिरंगे काँच के टुकड़े लगवा दिए थे। इसके बाद ‘दीवान-ए-खास’ आता है। वहाँ से कई वारहदारियों में से गुजरकर लालकिले की छत पर जाया जाता है इन वारहदारियों की दीवारें सुन्दर चित्रकारी से सुसज्जित हैं। लालकिले के सुन्दर उद्यान मुगल-सम्राटों के प्राकृतिक प्रेम को दर्शाते हैं। लालकिले के एक ओर मुगल सम्राटों की बेगमों के स्नानगृह हैं तो दूसरी ओर उनके श्रृंगार कक्ष हैं। अब तो केवल उनके चिह्न मात्र ही शेष रह गए हैं।

लालकिले का वर्तमान रूप :

आजकल लालकिले की सुरक्षा का जिम्मा भारत सरकार के हाथों में आ गया है क्योंकि आतंकवादी लोग इसे उड़ाने की धमकियाँ दे चुके हैं। लेकिन कड़ी सुरक्षा के बीच यह दर्शकों के लिए सदैव ही खुला रहता है। इसके मुख्य द्वार की प्राचीर पर हर वर्ष 15 अगस्त को हमारे . । देश के तत्कालीन प्रधानमन्त्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं तथा जनता को सम्बोधित करते हैं। इसके अन्दर भारतीय सेना के कुछ कार्यालय भी बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त इसके एक भाग में एक अजायबघर है, जिसमें प्राचीनकालीन अस्त्र-शस्त्र, कपड़े तथा आभूषण वगैरह दर्शकों को दिखाने हेतु रखे गए हैं।

उपसंहार :

लालकिला स्वतन्त्र भारत की अपनी धरोहर है। यहाँ पर हमारा तिरंगा झण्डा हमेशा फहराता रहता है। इसमें कवि सम्मेलन तथा अन्य सैनिक कार्यक्रम भी होते रहते हैं। हमें अपने देश की इस प्राचीनतम धरोहर की पूरे जी-जान से देखभाल करनी चाहिए।

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दिल्ली का लालकिला आज एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इसे प्रतिदिन हज़ारों पर्यटक देखने आते हैं। सन् 2007 में इसे यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट ने भी अपने रिकार्ड में स्थान दे दिया है। अब यह दुनिया की धरोहर बन गया है।

इसका निर्माण कार्य मुगल सम्राट शाहजहाँ ने 1638 ई० में आरंभ करवाया था और सन् 1648 में दिल्ली के लालकिले का निर्माण हो गया था। लालकिले की रूपरेखा (नक्शा) सलीमगढ़ किले से ली गई थी। यह मुगल काल की एक अद्भुत रचना है।

दिल्ली के लालकिले के निर्माण के पश्चात् औरंगज़ेब और अन्य मुगल सम्राटों ने इसमें बहुत से सुधार और निर्माण किए। अंग्रेजों के शासनकाल में दिल्ली का लालकिला सेना की छावनी के लिए इस्तेमाल होता था और स्वतंत्रता के पश्चात् आज भी यह सेना के आधीन है। शाहजहाँ के शासनकाल में, लालकिला शाहजहाँ की नई राजधानी शाहजहाँबाद का महल था, जो दिल्ली राज्य का मुस्लिम सातवाँ शहर था। शाहजहाँ अपनी आगरा राजधानी को शाहजहाँबाद लाए थे ताकि उनकी शान-शौकत में चार चाँद लग जाएँ।

दिल्ली का लालकिला यमुना नदी के किनारे पर स्थित है। इसकी दीवारों के चारों ओर खाई है। इसकी दीवार का उत्तरी-पूर्वी कोना पुराने किले सलीमगढ किले के नजदीक से होकर जाती है, जिसे इस्लाम शाह सूरी ने 1546 ई० में बनवाया था।

दिल्ली के लालकिले की दीवार 1.5 मील (2.5 कि.मी.) लम्बी और 60 फीट (16 मी.) ऊँची है। लालकिला मानव-कला का एक उत्कृष्ट नमूना है। यह पारसी, यूरोपीय और भारतीय कला का मिश्रण है। यह भारत की एक मुख्य इमारत है। सन् 1913 में इसे भारत ने महत्व देना प्रारंभ किया और इसकी सुरक्षा एवं सरक्षण के प्रयास किए जाने लगे। इसके दो मुख्य गेट हैं दिल्ली गेट और लाहौरी गेट। लाहौरी गेट लालकिले का मुख्य प्रवेश द्वार है। जैसे ही हम लाहौरी गेट में प्रवेश करते हैं, बाजार आरंभ हो जाता है। वहीं छत्ता चौक भी है। इस सड़क के दक्षिणी छोर पर दिल्ली गेट है।

लालकिले के अंदर अन्य मुख्य दर्शनीय इमारतें भी हैं, जैसे-नक्कारखाना; जो लाहौरी गेट और छत्ता चौक के मध्य में है। यह महल के मुख्य द्वार पर है। यहाँ संगीतकारों की गैलरी (संगीतज्ञ-दीर्घा) थी। इसी कारण इस स्थान का नाम नक्कारखाना पड़ गया। लालकिले में दीवाने-ए-आम है; जहाँ आम दर्शकगण उपस्थित होते थे। वहीं पर बालकानी में सम्राट का हीरे-जवाहरत से सुसज्जित सिंहासन भी था। वहाँ बैठकर बादशाह जनता को संबोधित करता था। इसके अतिरिक्त लालकिले में है-नहर-ए-बहिश्त; जो शाही व्यक्तिगत कमरा है, जहाँ से यमुना नदी को बहते हुए देखा जा सकता है। इसका निर्माण कुरान | में वर्णित स्वर्ग के अनुरूप कराया गया था। लालकिले में रंगमहल है; जो केवल रानियों के लिए था। एक खास महल है; जहाँ से राजा प्रतिदिन लोगों की कारगुजारियाँ देखता था। एक दीवान-ए-खास है; जिसका इस्तेमाल मंत्री और अन्य खास लोग करते थे। एक मोती मस्जिद है।

यह 1659 में बाद में बनवाई गई थी। यह औरंगजेब की व्यक्तिगत मस्जिद थी जो शाहजहाँ का उत्तराधिकारी था। एक हयात बख्श बाग है; जिसे मुगल वंश के अंतिम बादशाह बहादुर शाह ज़फर ने सन् 1842 में बनवाया था। जिसके बीच में एक तालाब है और जिसमें जल के दो स्रोत हैं। इन सभी आकर्षक स्मृति चिन्हों को देखने हजारों लोग लालकिला देखने आते हैं। दिल्ली के लालकिले की प्राचीर से हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं। नि:संदेह लालकिला भारत की शान है।

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